त्रसकाय!
त्रसकाय Mobile beings (two sensed to five sensed beings). स्थावर जीवों को छोडकर दो इन्द्रियों से पंचेन्द्रिय तक के जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रसकाय Mobile beings (two sensed to five sensed beings). स्थावर जीवों को छोडकर दो इन्द्रियों से पंचेन्द्रिय तक के जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेश्या मार्गणा – Leshyaa maarganaa.: Investigation of attitudes of beings. 14 मार्गणाओं में एक मार्गणा जिससे जीव के भावों का अन्वेषण किया जाता है “
तैतिल A country situated in Bharat kshetra (region). भरत क्षेत्र में स्थित एक देश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पापकर्मैकसग्रता- Papakarmaikasargata. Absence of the sense of right knowledge- an infraction of mditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार; कर्तव्य अकर्तव्य के विवेक से शून्य होना, मूढ़ता और कायोत्सर्ग के समय हिंसादि के परिणामों का उत्कर्ष होना”
तेईस सिंह Twenty three lions-the 1st dream of Bharat Chakravarti (an emperor) out of 16 dreams. भरत चक्रवर्ती को आए 16 स्वपनों में प्रथम स्वपन । इसका फल है वीर के अतिरिक्त 23 तीर्थंकरों के समय दुष्ट नयों की उत्पत्ति का अभाव होगा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तुल्य बल विरोध Having opposition equally. विरोध का एक प्रकार, ज्ञान को मान लेने पर सब पदार्थें का शून्यपना नहीं बन पाता है और सबका शून्यपना मान लेने पर स्वसंवेदन की सत्ता नहीं ठहरती है यह तुल्य बल विरोध है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्री :Name of an auspicious article kept near the idol of Lord Arihant.जिन प्रतिमा के पास विद्यमान रहने वाले 108 उपकरणो मे से एक।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावलिंग (साधु) – Bhavalinga (Sadhu). An absolute saint with perfect conduct. साधु का जैसा बाहर चारित्र है वैसा ही भाव होना ” प्रमत्त- अप्रमत्त गुणस्थान सम्बन्धी भाव होना ही भावलिंग है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाणितः पिंडपतन:An obstacle pertaining to saint food.आहार अंतराय का एक प्रकार।