चोरी-!
चोरी- बिना दी हुई वस्तु का लेना चोरी स्तेयहै। इस कथन का अभिप्राय है कि बाह्य वस्तु ली जाय या न ली जाय किंतु जहाँ संक्लेशरूप परिणाम के साथ प्रवृति होती है, वहाँ चोरी का दोष लगता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चोरी- बिना दी हुई वस्तु का लेना चोरी स्तेयहै। इस कथन का अभिप्राय है कि बाह्य वस्तु ली जाय या न ली जाय किंतु जहाँ संक्लेशरूप परिणाम के साथ प्रवृति होती है, वहाँ चोरी का दोष लगता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रथमोपषम सम्यग्दर्शन – देखें- प्रथमोपषम सम्यक्त्व। prathamopasama samyagdarsana- see (prathamopasama samyaktva)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनरंगलाल- Manarangalala. Name of a writer who wrote Namichandraka, specially 24, worshipping composition of 24 Jaina Lords and many other books. पंडित ; नमिचंद्रका, सप्तव्यसनचरित्र आदि के रचियता ” इनके द्वारा रचित 24 तीर्थंकरों की 24 पूजाएं अत्यंत प्रसिद्द हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रथम क्षण भावी- प्रथमतः उत्पन्न होने वाला। prathama ksana bhavi – rising at the first moment
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववेद – Bhavaveda. Psychic libido. वेद नोकषाय के उदय से मैथुन भाव होना, इसके ३ भेद हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाद – आलस्यकसाय सहित अवस्था को प्रमाद कहते है ” कसाय के तीव्र उदय से आछे कार्यो को करने में आदर भाव का न होना ” चार विकथा , चकाषाय, पञ्च इन्द्रियां , एक इस्नेह और एक निद्रा ये 15 प्रमाद है ” Pramada- Laziness, Carelessness, Negligence, 15 types of certain activities leading to…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक बुद्ध- स्वर्ग बुद्ध; वैराग्य का कारण देखकर स्वयं वैराग्य धारण करने वाले मुनि। pratyeka buddha – one who is self enlightened or self attained.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशुध्दि – Vishuddhi. A state of lack of passions. संक्लेश परिणामों की हीनता अथवा साता वेदनीय कर्म के बन्ध में कारणभूत विशुध्द परिणाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण (अनुयोग)- अग्रायणी पूर्व के 5 भेदों में एक भेद। Pramana (Anuyoga)- A part of scriptural knowledge (Purva)