शोधन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शोधन – Shodhana. The act of cleansing or purifying. संशोधन, शुद्ध करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शोधन – Shodhana. The act of cleansing or purifying. संशोधन, शुद्ध करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशमाभास- प्रषम भाव का झूठा अहंकार करने वाले मिथ्यादृशिट के सम्यक्त्व का सदभाव न होने से प्रषमाभास होता है। Prasamabhasa- False pride of spiritual calmness
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयतासंयत – Sanyataasanyata. One having control & restraints with minor vows. एकदेश रूप व्रतों के या अणुव्रत के धारक जीव ” व्रती श्रावक, क्षुल्लक व ऐलक ये संयतासंयत कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवर्तक (साधु)- जो ज्ञान से अल्प है परन्तु सर्व संघ की मर्यादा योग्य आचरण का जिसको ज्ञान है उसको प्रवर्तक साधु कहते है। Pravartaka ( Sadhu )- A type of Digamber Jain saints
गंधकुटी Seat of Lord in Samavashran – the holy assembly of Jaina lord. समावशरण के मध्य भगवान के बैठने का स्थान । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
झांझ A cymbal, to be kept near the idol of Lord Jinendra, Passion, Anger, Wickedness. जिनेन्द्र देव की प्रतिमाओं के समीप विद्यमान रहने वाले अष्ट 108 मंगल द्रव्यों में ण्क चित्त का बुरा आवेग, क्रोध, दुष्टता । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यक्षबाधित- pratyaksabadhita Refutable perception जिस साध्य की सिद्धी में प्रत्यक्ष से बाधा आये, जैसे अगिन ठंडी है।
देशातिचार A type of infraction related to mind, speech and body. अतिचार का एक भेद मन, वचन, काय तथा कृत, कारित, अनुमोदना के भेद से देशातिचार अनेक प्रकार का है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == महाव्रत : == अहिंसा सत्यं चास्तेनवंâ च, ततश्चाब्रह्मापरिग्रहं च। प्रतिपद्य पंचमहाव्रतानि, चरति धर्मं जिनदेशितं विद:।। —समणसुत्त : ३६४ अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, ये पांच महाव्रत ग्रहण कर श्रमण जिनदेशना के अनुसार धर्म का आचरण करे।