मत्स्योद्वर्त!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मत्स्योद्वर्त – Matsyodvarta.: An infraction of the meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार ” मछली की भांति कटिभाग को ऊपर निकालना “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मत्स्योद्वर्त – Matsyodvarta.: An infraction of the meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार ” मछली की भांति कटिभाग को ऊपर निकालना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यागमण्डल – पंच कल्याणक प्रतिश्ठा में किया जाने वाला एक विषेश पूजा विधान, इसमें प्रतिश्ठा में भाग लेने हेतू अनेक देवी देवताओ का आहवान करके उन्हें यज्ञभाग समर्पित किया जाता है।गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा संस्कृत यागमंडल के आधार से रचित हिन्दी पूजा ग्रंथ। Yagamandala-A special kind of worshipping to be observed in…
चंद्राभा Name of a chief female deity. ज्यितिशी देवों में इन्द्र चन्द्र की पट्ट महादेवी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मण्डप प्रतिष्ठा – Mandapa Pratistha. A particular kind of ritual procedure to be observed for the purity of Mandal (on which the idol of Lord Jinendra is installed and offerings are made during Vidhan & Pratishtha) before worshipping of the Lord. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं इन्द्र धवज आदि विधानों में मंडल के ऊपर विशेष…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नसंचया – विदेह क्षएत्र की 32 नगरियो मे 16 नगरी Ratnasancaya- Name of the 16th city situated in Videh Kshetra (region)
गृहीशिता’ क्रिया An auspicious act (leading worldly life ideally). गर्भान्वय की ५३ क्रियाओं का एक भेद; धार्मिक क्षेत्र में तथा ज्ञान के क्षेत्र में वृद्धि करता हुआ, अन्य गृहस्थों के द्वारा सत्कार किए जाने योग्य गृहस्थाचार्य होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मज्जा – Majja. Marrow (of a bone); pith; sap. औदारिक शरीर में पायीं जाने वाली एक धातु जो हड्डी से पैदा होतीहै “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगपत – एक साथ जैसे केवल ज्ञान होने के बाद अनन्त ज्ञान व अनन्त दर्षन एक साथ ही होता है। Yugapata-Unitedly, Combinedly
घोषसम Resonance (regarding scriptural knowledge ‘Shrutgyan’). अनुयोग श्रुतज्ञान ; जो घोष अर्थात त् द्रव्यानुयोग द्वारा के साथ उतोपन्न होता है इस कारण घोषसम कहलाता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नकंबल – रत्नों से बना एक कंबल। उज्जैन की सेठानी यषोभद्रा ने अपने पु़त्र सुकुमाल की पत्नियों के लिए रत्नकंबल खरीदा और पुत्र वधुओं के लिए उसकी जूतिया बनवायी। देंखें – सुकुमाल चरित्र Ratnakambala-Blanket of jewels