सूरकीर्ति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूरकीर्ति – Soorakeertee. Name of Bhattarak of Nandi group. न्ंदिसंघ बलात्कारगण वारां गद्दी के एक भट्टारक भावनंदि के शिष्य , विद्याचन्द्र के गुरू । समय वि0सं0 1167 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूरकीर्ति – Soorakeertee. Name of Bhattarak of Nandi group. न्ंदिसंघ बलात्कारगण वारां गद्दी के एक भट्टारक भावनंदि के शिष्य , विद्याचन्द्र के गुरू । समय वि0सं0 1167 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंकप्रभा – Pankaprabhaa. That (4th) earth which has the colour of clay or mud. चतुर्थ नरक भूमि; जिसकी प्रभा कीचड़ के समान है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाजनांग जातीय कल्पवृक्ष – Bhajanamga Jatiya Kalpavrksa. A type of wish fulfilling trees (providing uten-sils). भोगभूमि में पाये जाने वाले १० कल्पवृक्षों में एक, यह कल्पवृक्ष सुवर्ण एंव बहुत से रत्नों से निमित धवल झारी, कलश, गागर आदि बर्तन प्रदान करने वाला होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिहितास्त्रव – Pihitasrava. Name of the father of Tirthankar (Jaina- Lord) Padmaprabh- Suparshvanath in past birth, Name of a Digambar Acharya. तीर्थंकर पद्मप्रभ, सुपार्श्वनाथ के पूर्व भाव के पिता, एक दिगाम्बराचार्य “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बिंब – Bimba. Image or idol (of Lord etc.). प्रतिमा , मूर्ती “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्मसाम्पराय संयम – Sukshmasaamparaaya Sanyama. Restraints with minute greediness. मोहकर्म का उपशमन या क्षपण करते हुए सूक्ष्म लोभ का वेदन करना सूक्ष्मसांपराय संयम हैं और धारक महामुनि सूक्ष्मसांपराय संयत कहलाते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पित्त – Pitta. Bile (a bitter fluid secreted by the liver). औदारिक शारीर में यकृत द्वारा स्त्रावित पित्त नामक धातु “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म कृष्टि – Suksma Krishti. Gradual destruction of Karmas. कर्मो के अनुभाग को घटाकर सूक्ष्म कर देना ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुषमा सुषमा काल – Sushamaa- Sushamaa Kaala. Extremely pleasant period of worldly cycle (the 1st of Avasarpini Kal & the 6th of Utsarpini Kal according to Jaina Philosophy). अवसर्पिणी के प्रथम काल और उत्सर्पिणी के छटें काल का नाम । इसमें उत्तम भोगभूमि रहती है एवं इसका काल 4 कोड़ाकोड़ी सागर का है। इस…