आत्मख्याति!
आत्मख्याति A great commentary on ‘Samaysar’ written by Acharya Amritchandra. कुंदकुंदाचार्य कृत समयसार ग्रंथ पर संस्कृत में री अमृतचंद्र आचार्य कृत टीका।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मख्याति A great commentary on ‘Samaysar’ written by Acharya Amritchandra. कुंदकुंदाचार्य कृत समयसार ग्रंथ पर संस्कृत में री अमृतचंद्र आचार्य कृत टीका।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुप्रदेशी – काय; जो बहुप्रदेशी होता है अर्थात् 6 द्रव्यों में 5 द्रव्य (जीव, पद्गल, धर्म, अधर्म और आकाश) बहुप्रदेशी होने से अस्तिकाय है। Bahupradesi- Something multi space pointing
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बाला (देवी) – गजदंत कूट, पहद एवं वैमानिक इन्द्रों की देवी का नाम। Bala (Devi)- Name of female deities of Gajadant summit, of padma lake & of spatial Indras
द्वीप कमार A type of deities (having abodes). भवनवासी देवों का एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलमद- 8 मदों में एक मद; मैं सहस्त्रभट, लक्षभट, कोटिभट हूँ इस तरह का अहंकार होना। Balamada- pride of possessing strength
ईर्यापथिक A type of repentance (Pratikraman). 7 प्रकार के प्रतिक्रमणों में एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बप्पदेव- आचार्य शुभनन्दि के शिाय जिन्दोंने षट्खण्डागम के प्रथम पाँच खण्डों पर व्याख्या प्रज्ञप्ति तथा कवाय पाहुड़ पर उच्चारणा नामक टीका लिखी। इस टीका के दर्शन करके श्री वीरसेन आचार्य ने धवला नामक टीका रची। समय- ई.श. 1। Bappadeva- An acharya who wrote many famous commentary
उदयचन्द्र Name of an Acharya of Nandi group, Name of a poet. नन्दी]संघ (देशीयगण) की नयकीर्ति शाखा के एक गुरू अपभ्रंश कवि इनकी प्रधान कृति सुअंधदहमीकहा है (समय ई. सन् ११५० ११९६) ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मव्यवहार Conception of self consciousness. मात्र अविचलित चेतना ही मैं हूँ ऐसा मानना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विस्तार रूचि –VistaraRuchi. Those having interest of thorough study. शिष्यों के तीन भेदों, में एक भेद, विस्तार से समझने की रूचि रखने वाले शिष्य “