तुरग!
तुरग Horse. घोडा, अश्व। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आलेखित Written displayed or Intuitional illustration. चित्रित लिखा हुआ ध्यान में स्थिरता के पुरिपुष्ट हो जाने पर ध्येय का सवरूप ध्येय के सन्निकट न होते हुए भी स्पष्ट रूप से प्रतिभासित होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवागम स्तोत्र A religious hymn written by Acharya Samant- bhadra. आचार्य समन्तभद्र द्वारा रचित एक स्तोत्र । अपरनाम-आप्तमीमांसा।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लंका – 1 जम्बुद्वीप के लवण समुद्र के अन्दर स्थित राक्षस द्वीप की नगरी यहां का राजा रावण था। 2 वर्तमान मं लंका नगरी जो भारत के दक्षिण में स्थित है जिसे श्रीलेका के नाम से जाना जाता है। रावण की लंका यह नही है क्योकि यह लवण समुद्र में थी। Lamka-name of a…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संबंध – Sanbandha. Alliance, Relation, Connection. संयोग, मिलाप, साहचर्य ” जहां पर अभेद प्रधान और भेद गौण होता है वहां पर संबंध समझना चाहिए “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयोजना सत्य – Sanyojana Satya. A type of truth misinterpretation of any similar subjects or objects. सत्य वचन के 10 भेदों में एक भेद; चेतन-अचेतन द्रव्यों का विभाजन नहीं करने वाले वचन द्वारा चेतन पदार्थों की विवक्षा न कर केवल चक्र के आकार में रची हुई सेना को चक्रव्यूह कहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रिति – Shriti. Dependence, support, approach, Multiplicative increase in virtues. अवलम्ब, सहारा, पहुंच ” सम्यग्दर्शन आदि शुद्ध गुणों की गुणित रूप उत्तरोत्तर उन्नत अवस्था को प्राप्त कर लेना यह भाव श्रिति है, एवं सोपान पंक्तिक्रम से चढना यह द्रव्य श्रिति है ” भक्त प्रत्याख्यान सल्लेखना विधि के 40 अधिकारों में 9वां अधिकार, शुभ परिणामो…
उद्वेग Anxiety, Restlessness. इष्ट के वियोग में विह्वल भाव या घबराहट का भाव होना अर्थात् चिन्ता खेद विसमय आदि का होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयत – Sanyata. One with control & restraints, Another name of Digambar Jaina saint. महाव्रती श्रमण संयत कहलाता है ” संयत जीव छठे से चौदहवें गुणस्थान तक 9 गुणस्थानों में पाये जाते हैं ” दिगम्बर मुनि का अपरनाम “