द्रव्य उदय!
द्रव्य उदय Physical fruition (reg. Karmas). द्रव्य, क्षेत्र , काल व भाव के निमित्त के वश में कर्मों के फल का प्राप्त होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य उदय Physical fruition (reg. Karmas). द्रव्य, क्षेत्र , काल व भाव के निमित्त के वश में कर्मों के फल का प्राप्त होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्त्रिंशत – Sattrinshata. Thirty Six (basic restraints of Acharya etc.) 36 (आचार्य के 36 गुण; 12 तप, 10 धर्म, 6 आवश्यक, 5 आचार, 3 गुप्ति) “
द्रमिल A part of the south India. दक्षिण भारत का एक भाग जो मद्रास सेरिंगपट्टम और कामोरिम तक फैला हुआ है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षंड वन – Shanda Vana. The initiation forest of Lord Mahavira. तीर्थंकर महावीर का दीक्षा वन ” इसके अन्य नाम ज्ञातृ वन व मनोहर वन भी मिलते हैं “
दो गुणहानि A kind of decreasing series. गुणहानि आयाम को दो गुना करने पर जो प्रमाण प्राप्त होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लेष्मा – Shlesmaa. Phlegm, Mucus. कफ ” औदारिक शरीर में 6 अंगुलिप्रमाण श्लेष्मा होता है “
इन्द्रिय निग्रह See – I´driya Rodha. देखें इंद्रिय रोध।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतिगम्य – Shrutigamya. Knowledge acquired by something heard. अनपेक्षित रूप से प्रवृत्ति में कारण व श्रुतिमात्र से बोधित श्रुतिगम्य हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध (कर्मबंध)-कर्मो का बन्धना बन्ध है, यह 4 प्रकार का होता है; प्रकृति, स्थिति, अनुभाग, प्रदेष। Bandha (karmabandha)- Karmic bond
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतज्ञानी – Shrutgyaani. One well versed in scriptual knowledge. वस्तुस्वरुप को जानने वाला; श्रुतज्ञान अर्थात् शास्त्रज्ञान में पारंगत “