रत्नमाली!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नमाली – विद्याधर वंष का एक राजा Ratnamali- Name of a king of Vidyadhar Dynasty
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नमाली – विद्याधर वंष का एक राजा Ratnamali- Name of a king of Vidyadhar Dynasty
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिच्छन्न – Praticchanna. A type of peripatetic deities. व्यन्तर देवों की भूत जाति का एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोबाहु – आदिनाथ भगवान के 84 गणधरो में एक गणधर का नाम, आचार्य यषोभद्र के षिश्य, इनका अपरनाम आचार्य भद्रबाहु द्वितीय था। यं 8 अंगधारी थे तथा लोहाचार्य – 2 के गुरू थे। समय – वी नि 515 – 565 Yasobahu-Name of a chief disciple of lord Adinath, Also the name of the disciple…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतरावली – Prataraavalee. Squar of Aavalee ( a time unit). आवली का मार्ग “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्ति – पदार्थो को सिद्ध करने के लिए प्रयुक्त हेतू अथवा साधन। Yukti-Device, Stratagem
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पनंदी – Puspanamdi. A disciple of Toranacharya & the preceptor of Prabhachandra. आप तोरणाचार्य के शिष्य और प्रभातचन्द्र के गुरु (ई. ७०३) थे “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == त्याग : == ण हि णिरवेक्खो चागो, ण हवदि भिक्खुस्स आसयविसुदी। अविसुद्धस्स हि चित्ते, कहं णु कम्मक्खओ होदि।। —प्रवचनसार : ३-२० जब तक निरपेक्ष त्याग नहीं होता है, तब तक साधक की चित्तशुद्धि नहीं होती है और जब तक चित्तशुद्धि (उपयोग की निर्मलता) नहीं होती है, तब तक…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्करावती – Puskaravati. Name of a palace of Bharat Chakravarti. भरत चक्रवर्ती का एक महल “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नचतुश्टय – बलभद्र के चार रत्न, रत्नमाला, गदा हल और मूसल Ratnacatustaya-Four jewels of Balbhadra
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषदत्ता – Purusadatta. Ruling female demigod of Lord Sumatinath. भगवान सुमतिनाथ की शासन देवी (यक्षिणी) “