व्यक्त्तनिर्वृत्त्यक्षर!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यक्त्तनिर्वृत्त्यक्षर–Vyaktanirvrttyaksara. Power of pronouncing words possessed by five sensed beings. निर्वृत्त्यक्षरके दो भेदों में एक भेद; यह संज्ञी पंचेन्दिर्य पर्याप्तक तक के होता हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यक्त्तनिर्वृत्त्यक्षर–Vyaktanirvrttyaksara. Power of pronouncing words possessed by five sensed beings. निर्वृत्त्यक्षरके दो भेदों में एक भेद; यह संज्ञी पंचेन्दिर्य पर्याप्तक तक के होता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविषेण – वि सं 734 में पùपुराण के रचियता एक आचार्य। Ravisena- name of an Acharya who wrote Jain Ramayan called as ‘Padmapuarn’
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हाहा – Haahaa. A type of peripatetic deity. A large unit of time. गंधर्व नामा व्यंतर जाति का एक भेद। काल का एक प्रमाण, 84 लाख हाहांग त्र 1 हाहा।
तीर्थंकर नामकर्म प्रकृति Auspicious Karmic nature causing the state of Tirthankar (Jaina -Lord). नामकर्म की एक पुण्य प्रकृति, इसका बंध सोलहकारण भावना भाने से होता है। ऐसे परिणाम केवल मनुष्य भव में और वहाँ भी किसी तीर्थंकर अथवा केवली के पादमूल में ही होने संभव है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हल – Hala. Plough, a divine weapon possessed by Ram. कृषि के लिए उपयोग मे आने वाला एक यंत्र, देवोपुनीत एक अस्त्र-महालोचन देव न उन्हे यह अस्त्र रामचंद्र जी को दिया था।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिनंदि – Harinamdi. Name of a Bhattarak of Nandi group. नंदिसंध बलात्कारयण भट्टारक आम्नाय की उज्जयिनी गट्ठी के एक भट्टारक महीचन्द्र के गुरु। समय – वि. 948।
ऋषि पुत्र An author of ‘Rishiputra Sanhita’. निमित्त शास्त्र तथा ऋशिपुत्र संहिता के रचियता एक ज्योतिशाचार्य (ई. सन् 6-7 की संधि)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]