त्रिवर्ण!
त्रिवर्ण Three caste divisions (Kshatriya, Vaishya and Shudra). क्षत्रिय , वैश्य और शुद्र ये तीन वर्ण। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिवर्ण Three caste divisions (Kshatriya, Vaishya and Shudra). क्षत्रिय , वैश्य और शुद्र ये तीन वर्ण। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ख The second consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी लिपि का दूसरा व्यंजन अक्षर , इसका उच्चारण स्थान कंठ है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]] अथवा Sky, Sense organ, Infinite. आकाश, इन्द्रिय, अनंत या अनंता की अपेक्षा सहनानी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यंत्रेशयंत्र–Yantresa yantra. A metallic plate engraved with some auspicious mystic diagram & words. एक विशेष यंत्र; यंत्रेश मंत्र की विभिन्न रेखाक्रतियो में चित्रित रचना”
खट्वांङ्ग Human skull placed on a bone (symbol of a terrific divinity). एक हड्डी पर मानव खोपड़ी का होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संरक्षणानंद – Sanraksanaananda. To worry for prosperity. रौद्रध्यान का एक भेद; धन के उपार्जन एवं संरक्षण आदि का चिंतन करना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु : == सं किं गुरु: पिता सुहृदा योऽभ्यसूययाऽर्भं बहुदोषम्, बहुषु वा दोषं प्रकाशयति न शिक्षयति च।। —नीतिवाक्यामृत : ११-५३ वे गुरु, पिता व मित्र निन्दनीय या शत्रु सदृश हैं, जो ईष्र्यावश अपने बहुदोषी शिष्य, पुत्र व मित्र के दोष दूसरों के समक्ष प्रकट करते हैं और उसे…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिवादी – Prativaadee. Respondent, defendant. प रतिपक्षी, विपक्षी “
दशकरण चूलिका A part or lesson of ‘Gommatsar-Karmakanda’ treatise. गोम्मटसार – कर्मकांड ग्रंथ का एक अध्याय , इसमें 10 कारणों का स्वरूप है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तीव्रकषायी : == आत्मप्रशंसनकरणं, पूज्येषु अपि दोषग्रहणशीलत्वम्। वैरधारणं च सुचिरं, तीव्रकषायाणां लिंगानि।। —समणसुत्त : ६०० अपनी प्रशंसा करना, पूज्य पुरुषों में भी दोष निकालने का स्वभाव होना, दीर्घकाल तक वैर की गाँठ को बांधे रखना—ये तीव्रकषाय वाले जीवों के लक्षण हैं।