उपचितावयन पद!
उपचितावयन पद Specified terms of organ diseases etc. रोगादि के निमित्त मिलने पर किसी अवयव के बढ़ जाने से जो नाम बोले जाते हैं जैसे गलगंड लम्बकर्ण आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपचितावयन पद Specified terms of organ diseases etc. रोगादि के निमित्त मिलने पर किसी अवयव के बढ़ जाने से जो नाम बोले जाते हैं जैसे गलगंड लम्बकर्ण आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेश उदय- प्रकृति, स्थिति आदि की अपेक्षा उदय का एक भेद; कर्म प्रदेषों का उदय में आना। pradesa udaya – manifestation of karmic space points
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोगज परिणाम- आदिमान पिरणाम का एक भेद; जो परिणाम बाह्म निमित पर आश्रित हों । जैसे- ज्ञान,शील, भावना आदि का गुरु उपदेष के निमित से होना, अचेतन मिट्टी आद का कुम्हार आदि के प्रयोग से घटरुप परिणमन आदि। PrayogajaParinama- Results of practical experiments (like knowledge gained from preaching etc)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमेयकमलमार्तड- उचाईं मधिक्यनन्दि (ई. 925-1023) कृत परीक्षामुख पर आचार्य प्रमानन्द ( ई. 950-1020) कृत एक टीका। इसकी हिन्दी दिसा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से उनकी षिश्या आर्यिका श्री जिनमती माताजी ने की है। (समयबीसवीं ससदी का उŸाराद्ध)। Prameyakamalamartanda- A book written by acharyaprabhachand
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाद प्रत्यय- कर्म बंध के 5 कारणों में एक कारण; षुभ कार्यो में आलस्य करना। PramadaPratyaya- carelessness in auspicious activities
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण संग्रह- आचार्य अकलंक भट्ट (ई. 620-680) कृत एक ग्रंथ। PramanaSamgraha- A book written by Acharya AkalankaBhatta
इंद्रधनुष Rainbow. आकाश में बनने वाला सप्तरंगी धनुषाकार चित्र।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यूषकाल- प्रतः का संधि काल। pratyusakala – daybreak, dawn period
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभास्वर- उज्जवल, चमकीला, सौधर्मेनद्र द्वारा प्रस्तुत वृशदेव का एक नाम। Prabhasvara- Luminous, A name of Lord Rishabhdev given by SaudharmaIndra
उद्धारसागर A time unit. काल का एक प्रमाण 10 कोड़ाकोड़ी उद्धारपल्योपन काल का एक उद्धारसागर होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]