लाक्षा वाणिज्य कर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाक्षा वााणिज्य कर्म – लाख, चमडा आदि पदार्थ का व्यापार करना। Laksa Vanijya karma-Trade of sealing vax or shellac
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाक्षा वााणिज्य कर्म – लाख, चमडा आदि पदार्थ का व्यापार करना। Laksa Vanijya karma-Trade of sealing vax or shellac
घनमूल Cube root. गणित में घनराशि का मूल अन्नक- जैसे ६४ का घनमूल ४ है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोज्यशूद्र:A lower division of people of society. कारू शूद्र का एक भेद “
गुणनिमित्तक नाम The names like krishna, Mahavira etc. which are pronounced to express virtues. ऐसे नाम जो गुणों के निमित्त से व्यव हार में आते हैं, जैसे कृष्ण, महावीर आदि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगांतराय कर्म:Obstructive Karma in the way of worldly enjoyments. अंतराय कर्म का एक भेद; जिस कर्म के उदय से जीव भोगने की इच्छा करता हुआ भी नहीं भोग पाता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवित्ति – Sanvitti. Consciousness, Intuition. ज्ञान, चेतना, अनुभव “
ग्रहाङ्ग A type of wish fulfilling trees (Kalpavrikshas). कल्पवृक्षों का एक भेद; जो आवश्यकतानुसार राजमहल , सभाग्रह आदि देते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लय – लीनता, तन्यमयता जो मुनि कल्पना के जाल को दूर करने अपने चैतन्य आनंन्दमय स्वरूप में लय को प्राप्त होता है वही निष्चयरत्नत्रय का स्थान होता है। Laya-Absolute engrossment
”गिरिदारिणी” A divine power possessed by ‘Ravan’. रावण को प्राप्त एक विद्या ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]