घ्राण!
घ्राण Nose-a smelling sense. नासिका ; ५ इन्द्रियों में तीसरी इन्द्रिय ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
घ्राण Nose-a smelling sense. नासिका ; ५ इन्द्रियों में तीसरी इन्द्रिय ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्यानगृद्वि – Styanagraddhi. To commit abnormal activity in the state of somnambulism (walking habit in the sleeping state).5 निद्रांओ मे एक निन्द्रा, स्वप्न मे उठकर व्यक्ति कोई भयानक असाधारण कार्य करके पुनः सो जाये।
चलबिम्ब प्रतिष्ठा Installation ceremony of small idols. एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा सकने वाली प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधिगुप्त – Samaadhigupta. The predestined 18th Tirthankar (Jaina-Lord). भाविकालीन 18 वें तीर्थकर है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोरम्य – Manoramya. Name of a king of Rakshas dynasty. राक्षसवंशी एक राजा , राजा महाबाहु के पश्चात लंका का स्वामित्व इसे ही प्राप्त हुआ था “
चारूपाद One who is going to be 23rd (predestined) Tirthankar (Jaina-lord). भविष्यत्कालीन २३वें तीर्थंकर देवपाल का जीव ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चंगदेव An ancestor of poet Haridev. मयणपराजय चरिउ के रचयिता कवि हरिदेव के पूर्वज ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समरस – Samarasa. Equanimous nature. समतारुपी रस अर्थात् अनुभवन, घ्यानलीन मुनि समरस का आस्वाद प्राप्त करते हैं।
ईर्यापथकर्म Flow of non – binding Karmas. योग से जिन कर्मों का आस्रव होता है पर बंध नहीं होता अगले भव में बिना फल दिये ही झड़ जाते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विसृष्टांग तप –Visratamga Tapa. An austerity or meditation, keep the body ex-actly loose. कायक्लेश तप का एक भेद; जिस तप में सम्पूर्ण शरीर ढीला छोड़ दिया जाये उसे विसृष्टांग तप कहते हैं “