धृत धर्मा!
धृत धर्मा A king of Kuru dynasty. राजा धृतव्यास के पश्चात् हुआ एक कुरुवंशी राजा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धृत धर्मा A king of Kuru dynasty. राजा धृतव्यास के पश्चात् हुआ एक कुरुवंशी राजा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतभावना – Shrutabhaavanaa. A kind of auspicious reflection. 5 उत्तम भावना में एक भावना; श्रुतभावना करना अर्थात् तद्विषयक ज्ञान में बारम्बार प्रवृत्ति करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध-अहिंसा अणुव्रत का एक अतिचार (जानवरों इत्यादि को बंधन में रखना), आत्मा औश्र कर्मो का एक क्षेत्रा वगाह संबंध होना। Bandha- Bondage, tying up, union, bond (reg. karmic theory)
धारावाहिक ज्ञान Continuous contemplation of anything. किसी विषय विशेष का श्रृंखलाबद्ध ज्ञान। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आनत(इन्द्र) A type of celestial deities. तेरहवें स्वर्ग के इन्द्र।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
धातकीखंडसिद्ध Beings who get salvation from Dhatkikhand (island). धातकीखंड द्वीप से सिद्ध होने वाले जीव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीवत्स – Shreevatsa. A particular type of mark on the chest of meritorious persons, Name of a propounder of Vaishesik literature. तीर्थंकर आदि पुण्यात्माओं का एक शारीरिक लक्षण जो वक्षःस्थल पर होता है ” पार्श्वनाथ चरित्र के अनुसार उनकें नवमें भव पूर्व में पोदनपुर के राजा अरविंद की मुनिअवस्था में उनके वक्षस्थल का श्रीवत्सम…
साधु-जो अट्ठाईस मूलगुणों का पालन करते हैं, सदा रत्नत्रय के साधन हेतु ध्यान और अध्ययन में लगे रहते हैं, वे साधु परमेष्ठी कहलाते हैं। आचार्य, उपाध्याय और साधु ये तीनों ही दिगम्बर वेषधारी मुनि होते हैं। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
इक्ष्वाकुवंश A dynasty originated from Lord Adinath. भगवान आदिनाथ से यह वंश प्रारम्भ हुआ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
धर्मशर्माभ्युदय Name of two books (1) written by poet Asag (2) written by poet Harichand. कवि असग (ई. 988) कृत धर्मनाथ तीर्थंकर चरित, कवि हरिचन्द (ई. 10 का मध्य) कृत एक संस्कृत काव्य। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]