निरंतर!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरंतर – Nirantara. Continuous, constant. नित्य, लगातार होने वाला, सतत, अविच्छिन्न, सदा बना रहने वाला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरंतर – Nirantara. Continuous, constant. नित्य, लगातार होने वाला, सतत, अविच्छिन्न, सदा बना रहने वाला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वकृष्टि – Parsvakrsti. A type of Krishtics (gradual destruction of passions). पहले समय में की गई कृष्टि के समान ही अनुभाग लिये जो नवीन कृष्टि द्वितीयादि समयों में की जाती है, पूर्व कृष्टि के पार्श्व में ही उनका स्थान होने से वह पार्श्व कृष्टि कहलाती हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुमतिसागर (आचार्य) – Sumatisaagara (Aachaarya). Name of Digambar Acharya of 20th Century of the tradition of Aacharya Shantisagar (Chhani). आचार्य श्री शांतिसागर जी छाणी (राज0) की परम्परा में हुए एक आचार्य (समय ई0 20 वीं शताब्दी) ।ये तेरह पंथ आम्नाय के कट्टर समर्थक हुए है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारलौकिक भय – Parlaukika Bhaya. Fear regarding the next birth (fear of next world). ७ भयों में एक भय; मेरा दुर्गति में जन्म न हो इत्यादी प्रकार से ह्रदय का आकुलित होना “
उत्तरार्ध (कूट) Name of summits of Vijayardha mountain of Bharat & Eravat region. भारत क्षेत्र के विजयार्थ पर्वत का 8वाँ एंव ऐरावत क्षेत्र के विजयार्थ पर्वत का दूसरा कूट।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेश्या – Leshya.: Karmic stain , Aura , colouration. कषाय से अनुरंजित जीव की मन वचन काय की या जो आत्मा को शुभाशुभ कर्मों से लिप्त करे ” कृष्ण , नील , कपोत , पीत ,पद्य , शुक्ल इसके ये 6 भेद है “
उत्तरध्ययन A type scriptural knowledge (Shrutgyan). अंगबाह्य श्रुतज्ञान का एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाप आस्त्रव – Papa Asrava. Influx of sinful Karmas. पाप कर्मो के आने के कारणभाव- कलुषता, विषयों के प्रति लोलुपता, पर को परिताप करना आदि”