सर्वायुध!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वायुध – Sarvaayudhaa. See- Sarvaatmabhuuta. देखे – सर्वात्मभूत ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वायुध – Sarvaayudhaa. See- Sarvaatmabhuuta. देखे – सर्वात्मभूत ।
दूर श्रवणत्व ऋद्धि A super distantial power of hearing. बुद्धि ऋद्धि का एक प्रकार जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को श्रोत इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित ध्वनि या शब्दों को सुनने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
छेदप्रायश्र्चित A type of repentance. प्रायश्र्चित का एक भेद ; दिवस , पक्ष , महीना आदि की प्रव्रज्या का छेद करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
णमोंकार मंत्र पूजा Name of a worshipping hymn written by Ganini Shri Gyanmati Mataji based on the eulogy of Panchparmeshthi (Arihant, Siddha, Acharya, Upaddhyay & Sadhu). गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी (ई.श.20 उत्तरार्द्ध) द्वारा लिखित पंचपरमेष्ठियों की भक्तिपर आधारित एक पूजा, इसे प्रतिदिन एंव णमोकार वृत में करने की परंपरा है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विधिसाधक हेतु – Vidhisadhaka. Hetu. Cause proving the existence or reality. जो हेतु किसी बात के अस्तित्व को सिध्द करे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वयश – Sarvayasha. Name of the 25th chief disciple of Lord Rishabhdev भगवान ऋषभदेव के 25 वें गणधर “
दुःखरूप Irksome, Troublesome, Distressing. हिंसादि पाप दुःख के कारण होने से दुखरूप कहलाते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वतोभद्र विधान – Sarvatobhadra Vidhaana. A composition of worshipping hymn composed by Ganini Gyanmati Mataji. जैन आगम में वर्णित पाॅंच प्रकार की पूजाओं में से एक; यह सर्वतोभद्र विधान पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा सन् 1987 में लिखित सबसे बडा विधान है। इसमें 101 पूजाएॅं है, इसको लिखने में 40 छन्दों का प्रयोग…
दिव्याष्टगुण Eight virtues of salvated one. सिद्ध परमेष्ठी के 8 गुण अनंतज्ञान, अनंतदर्शन, अव्याबाधत्व, सम्यक्त्व, अवगाहनत्व, सूक्ष्मत्व, अगुरूलघुत्व , अनंतवीर्य ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]