आहार-काल!
आहार-काल Divinely emanation of translocational body (Aharak Sharir). दिगम्बर जैन साधुओं का भोजन काल-3 मुहूर्त जघन्य 2 मुहूर्त मध्यम 1 मुहूर्त उत्कृष्ट काल है(मूलाचार ग्रन्थ के अनुसार)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहार-काल Divinely emanation of translocational body (Aharak Sharir). दिगम्बर जैन साधुओं का भोजन काल-3 मुहूर्त जघन्य 2 मुहूर्त मध्यम 1 मुहूर्त उत्कृष्ट काल है(मूलाचार ग्रन्थ के अनुसार)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक समुद्घात Bondage of Aharak Vargana for the formation of translocational body (Aharak Sharir). सूक्ष्म तत्व के विषय में जिसे जिज्ञासा उत्पन्न हुई है उन परम ऋषि के मस्तक में से मूल शरीर से सम्पर्क बनाये रखकर एक हाळा ऊँचा सफेद रंग का सवाँग सुन्दर पुतला निकलकर अन्तर्मुहुर्त में जहाँ कहीं भी केवली भगवान को…
आहारक शरीर बंध A type of physique making karmic nature causing formation of translocational body (Aharak Sharir). आहारक शरीर बनने के लिये आहारक वर्गणाओं का परस्पर मिल जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक शरीर नामकर्म प्रकृति Chief and secondary parts of Aharak Sharir. वह नामकर्म प्रकृति जिससे आहारक शरीर बनता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक शरीर अंगोपांग Translocational body (which emanates from the body of a saint at the sixth stage of spiritual development i.e. 6th Gunsthan). वह नामकर्म जिसके उदय से मुनियों के मस्तक से जो आहारक शरीर निकलता है उसमें अंगोंपांग होते हैं, उसे आहारक शरीर आंगोंपांग कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक शरीर A kind of Karmic molecules causing body formation. छठे गुणस्थानवर्ती प्रमत्त संयत साधु सूक्ष्म तत्व के विषय में जिज्ञासा होने पर जिस शरीर के द्वारा केवली भगवान के पास जाकर जिज्ञासा का समाधान करते हैं उसे आहारक शरीर कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक लव्धि Extra – ordinary power of translocation (related to soul). एक ऋद्धि प्रमत्त गुणस्थानवर्ती मुनि को आहारक शरीर बनाने की शक्ति का प्रकट होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक मिश्र काययोग Vibration in soul-points during the completion of Aharak Sharir. आहारक शरीर की उत्पत्ति प्रारम्भ होने के प्रथम समय से लगाकर शरीर पर्याप्ति पूर्ण होने तक अन्तर्मुहुर्त के मध्यावर्ती अपरिपूर्ण शरीर के द्वारा उत्पन्न योग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक मार्गणा An investigation stage expressed about assimilative (Aharak) and non – assimilative (Anaharak) state of beings. 14वीं मार्गणा जिसमें जीवों के आहारक व अनाहारक का कथन है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक द्विक् Dyad assimilation pertaining to Aharak Sharir. आहारक शरीर आहारक अंगोंपांग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]