लाब्धिसम्पन्न ऋषि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाब्धिसम्पन्न ऋषि – सम्यग्दर्षन प्राप्ति का एक निमित लब्धिसम्पन्न ऋशियो का दर्षन। Labdhisampanna Rsi-Super saints, visiting of whom is a cause of right faith
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाब्धिसम्पन्न ऋषि – सम्यग्दर्षन प्राप्ति का एक निमित लब्धिसम्पन्न ऋशियो का दर्षन। Labdhisampanna Rsi-Super saints, visiting of whom is a cause of right faith
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजर्षी – ऋशि का एक भेद – विक्रिया और अक्षीण षक्ति के धारक साधु। Rajasrsi- A type of saints possessing super powers
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजमल सत्यवाक्य – ई 816 – 830 के एक राजा का नाम।इनके राज्यकाल में ही आचार्य विद्यानंदी नं 1 के द्वारा आप्त परीक्षा प्रमाणपरीक्षा युक्त्यानुषासन गंरथ लिखे गए। Rajamalla Satyavakaya-Name of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रागांश – Ragamsa Partial Attachment राग का अंश मात्र \ यह भी कर्म बंध का कारण है ” यह दशवे गुढ़इस्थान तक होता है
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राक्षस वंश – पिद्याधरो का एक वंष, ये न देव होते हे न राक्षस। राक्षस नामक द्वीप के रक्षक होने से राक्षस कहलाये। Raksasa vansa-Name of a dynasty
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसाधिकाम्मोद – रसधिक जाति के मेघ। यं रस की वर्शा करते हैं।उत्सर्पिणी काल में अतिदुशमा काल के अन्त में ये बरसते है जिससे घरती उपजाउ होती है। Rasadhikammoda-A kind of clouds causing juicy raining
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रश्मिवेग – पुश्कलावती के विजयार्ध पर त्रिलोकोत्तम नगर के राजा विद्युतगति का पुत्र था।युवावस्था में दीक्षित हुआ, योग में लीन स्थिति में एक अजगर निगल गया।समाधिपूर्वक मरने से अच्यूत स्वर्ग के पुश्कर विमान मे देव हुअ्रा। Rasmivega-The son of kind Vidyutgati of Trilokottam city situated in Pushkalavati country of Vijayardh mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रश्मिकलाप – एक हार, यह 54 लडियों का होता है। Rasmikalpa- A kind of wreath with 54 strings
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रावण – 8 वा प्रतिनारायण राजा रत्नश्रवा व रानी कैकसी का पुत्र अपरनाम दषानन। यह लंका का राजा था इसकी 18 हजार रानियां थी। जैन धर्म के अनुसार सीता का हरण कर नारायण लक्ष्मण के हाथों मरकर तीसरे नरक गया। Ravana-The 8th Pratinarayan, The son of the king ratnasharva his other name was dashanan
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रियोग – साधुओं का एक कृति कर्म। सायंकालीन प्रतिक्रमण के पष्चात योग भक्तिपूर्वक जैन साधु रात्रियोग धारण करते है।प्रात कालीन सामायिक से पूर्व योग भक्तिपूर्वक ही उसका निश्ठापान करते हैं। Ratriyoga-Meditation activities to be observed by saints during night hours (an austerity)