वणिक् कर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वणिक् कर्म – Vanik Karma: Business activities. मन,वचन,काय तीनों के व्यापार में प्रवृत्ति होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वणिक् कर्म – Vanik Karma: Business activities. मन,वचन,काय तीनों के व्यापार में प्रवृत्ति होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वड्ढमाणचरिउ –Vaddhamaanachariu Name of a treatise written by poet Shridhar. कवि श्रीधर (ई .श. 12 का उत्तरार्ध) कृत 10 संधियों वाला अपभ्रंश काव्य ग्रन्थ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वट्टकेर –Vattakera: Another name of kund-kund Acharya,who wrote Moolachar Granth (a treatise). आचार्य कुन्दकुन्द का अपरनाम जिन्होंने मूलाचार ग्रन्थ की रचना की “समय –ई .स .127 -179 “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्रनुकंपा–Mishranukanpa. A type of compassion. अनुकम्पा के तीन भेदो में एक भेद; अणुव्रती अर्थात् गृहस्थो पर जो दया की जाति है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वट वृक्ष-Vata Vraksha The Banyan tree under which Lord Rishabhdev got initiated and obtained omniscience. बरगद का पेड़ ,तीर्थंकर ऋषभदेव का दीक्षा एवम केवलज्ञान वृक्ष “युग के आदि में भगवान ऋषभदेव ने प्रयाग (इलाहाबाद ) में वटवृक्ष के निचे जैनेश्वरी दीक्षा ली थी “आज भी प्रयाग के मिलिट्री क्षेत्र में स्थित अक्षयवटवृक्ष भगवान के…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रार्गल –Vajraargal: Name of the 13th city of southern Vijayardh mountain. विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी का 13वां नगर “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्रश्रद्धा–Mishrashraddha. To have right & wrong reverence or devotion. एक ही समय में तत्त्व और अतत्त्व दोनों पदार्थो की श्रद्धा होना” अर्थात् सम्यक मिथियात्व रूप मिला हुआ श्रद्धान”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रा पृथिवी –Vajraa Prithivii: An earth of middle universe. मध्यलोक की एक पृथिवी “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्र शल्य–Mishra Shalya. A type of internal sting. द्रव्य शल्य के तीन भेद मै से एक भेद; सचित्त एवं अचित्त दोनों प्रकार के द्रव्यों में ममत्व भाव”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रांकुशा –Vajraankushaa: Name of a super power. एक विद्या “