स्वहित!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वहित – Svahita. One own benefit, benefiting self. हित के दो भेदो मे प्रथम भेद- आत्महित।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वहित – Svahita. One own benefit, benefiting self. हित के दो भेदो मे प्रथम भेद- आत्महित।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वहिंसा – Svahimsaa. Passionate feelings as volitional violence. भावहिंसा-प्रमाद से युक्त आत्मा पहिले स्वंय अपने द्वारा ही अपना द्यात करता है अर्थात् रागादि प्रमाण भाव ही स्वहिंसा है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वहस्त क्रिया – Svahasta Kriyaa. Doing some work by oneself. साम्परायिक आस्रव सम्बन्धी 25 किं्रयाओ मे एक किं्रया, दूसरे के द्वारा करने योग्य कार्य को स्वयं संपादित करना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्थान-स्वस्थान-अवस्थान – Svasthaana-Svasthaana-Avasthaana. Activity done by one in own birth place. अपने उत्पन्न होने के ग्राम, नगर अथवा अरण्य मे सोना, बैठ़ना, चलना आदि व्यापार से युक्त रहने का नाम स्वस्थान-स्वस्थान-अवस्थान है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्थान सन्निकर्ष – Svasthaana Sannikarsa. Relativity of karmas with matter, region, time etc. सन्निकर्ष के दो भेदो मे एक ंभेद। किसी विवक्षित एक कर्म का जो द्रव्य, क्षेत्र, काल एवं भाव विषयक सन्निकर्ष होता है वह स्वस्थान सन्निकर्ष कहलाता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साक्षात् प्रत्यक्ष हेतु – Sakshaat Pratyaksha Hetu. A direct cause causing immediate result as the evolution of knowledge with destruction if ignorance. प्रत्यक्ष हेतु के दो भेदो मे एक भेद। अज्ञान का विनाष ज्ञानरुपी दिवाकर की उत्पत्ति, देव मनुष्यादिको के द्वारा निरन्तर की जाने वाली विविध प्रकार की अभ्यर्थना और प्रत्येक समय होने वाली…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साक्षर शब्द – Sakshara Sabda. Syllabary language. मनुष्यों की भाषा साक्षरी तथा पशु-पक्षियो की निरक्षरी होती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साकेता – Saaketaa. Another name of Ayodhya (birth place of lord Adinath, Ajitnath, Abhinandannath, Sumatinath & Anantnath). भरत क्षेत्र की एक नगरी। अपरनाम अयोध्या। तीर्थकर आदिनाथ अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ, अनंतनाथ की जन्म नगरीं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साकार स्थापना – Saakaara Sthaapanaa. If the representative and the represented are similar in fiqure, then such installation are called Sakar Sthapana. तदाकार स्थापना निक्षेप, पाषाण या धातु की बनी हुई तदाकार प्रतिबिम्ब मे जिनेन्द्र भगवान की या इन्द्र की स्थापना करना तदाकार स्थापना है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साकार मंत्रभेद – Saakaara Mantrabheda. An infraction of vow of true speech to expose the secret of other with the intention of their insult. सत्याणुव्रत का एक अतिचार, चर्चा वार्ता से अथवा मुख की आकृति आदि से दूसरे के मन की बात को जानकर इसलिए प्रकट कर देना कि उसकी बदनामी हो।