पारिषद्देव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिषद्देव – Parisadadeva. Friendly deities of a council. इन्द्र सभा के सदस्य देंव, जो सभा में मित्रवत् होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिषद्देव – Parisadadeva. Friendly deities of a council. इन्द्र सभा के सदस्य देंव, जो सभा में मित्रवत् होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिव्राज्य क्रिया – Parivrajya Kriya. Abandoning of worldly life after completing household duties. कर्त्रन्वयी ७ क्रियाओं में एक क्रिया; ग्रहस्थ धर्म का पालन करने के पश्चात् मुनि दीक्षा ग्रहण करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारियात्र – Pariyatra. Northem part Vindhya country, Name of a mountain. विन्ध्य देश का उत्तरीय भाग, एक पर्वत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारितापिकी क्रिया – Paritapiki Kriya. Activity causing pain to self & others. साम्परायिक आस्त्रव की २५ क्रियाओं में एक क्रिया; जो क्रिया स्वयं व् दूसरे को दुख उत्पन्न करावे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक ॠध्दि – Parinamika Rddhi. A type of supernatural power. बुध्दिॠध्दि के १८ भेदों में १५वें भेद अष्टांग महानिमित्त के तीन भेदों में तीसरा भेद- जिसके प्रभाव से निज- निज जाति विशेषों में बुध्दि उत्पन्न होती है (धवला पुस्तक ९ से) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक भाव – Parinamika Bhava. A type of instinct of nature of living beings. जीव के निज ५ भावों में एक भाव. इसके तीन भेद होते हैं- जीवत्व, भव्यत्व और अभव्यत्व “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक परमाणु – Parinamika Paramanu. Resultant atoms with the property of absorbing other atoms. संख्यात, असंख्यात स्निग्ध या रुक्ष गुण के अंशो से युक्त अपने रूप में परिणमन कराने वाला परमाणु “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिणामिक गति – Parinamika Gati. Resultant motion of air, fire etc. स्वभाव गति; वायु, अग्नि, परमाणु, मुक्तजीव, ज्योतिर्देव आदि की गति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिजात सिध्दार्थ वृक्ष – Parijata Siddhartha Vrksha. Name of a tree with the idols of Lord Siddha found in the 6th land of Samavasaean- holy assembly of Jaina- Lord. तीर्थंकरों के समवसरण की छठी भूमि के चार सिध्दार्थ वृक्षों- नमेरु, मंदार, संतानक एवं परिजात में से एक, जिसके मुलभाग में सिध्दों की प्रतिमाएं विराजमान…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारिग्राहिकी क्रिया – Parigrahiki Kriya. Activity causing constant attachment to worldly objects. सम्परायिक आस्त्रव की २५ क्रियाओं में एक क्रिया; यह परिग्रह में प्रवृत्ति कराने वाली होती है “