सिद्धशिला विधान पढ़ें
सिद्धशिला विधान की रचना करके पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने हम सभी को सिद्धशिला के ज्ञान से परिचित कराया है ।
तीन भुवन के मस्तक पर ईषत प्रग्भार नाम की आठवीं पृथ्वी है, इस आठवीं पृथ्वी के मध्य में रजतमयी सिद्धशिला है आठवीं पृथ्वी के ऊपर 7050 धनुष जाकर सिद्धों का आवास है इन सिद्धों की उत्कृष्ट अवगाहना 525 धनुष एवं जघन्य साढ़े तीन हाथ होती है।
इस विधान में पूज्य माता जी ने 218 अर्घ्यों योग के माध्यम से ढाईदीप से (जंबूद्वीप लवण समुद्र धातकीखण्ड द्वीप कालोदधी समुद्र पुष्कारार्ध द्वीप) मोक्ष प्राप्त सभी सिद्ध भगवन्तों की पूजा भक्ति करने का बहुत ही सुंदर माध्यम प्रदान किया है यह विधान आपके पुण्य को वृद्धिंगत करें , यही मंगल कामना है