रोहिणी नाटक पढ़ें
महारानी रोहिणी जो कि हस्तिनापुर के महाराजा अशोक की पत्नी थी , जिसके पुण्य का इतना प्रबल उदय था कि उसे यह भी मालूम नहीं था कि रोना किसे कहते हैं ? उसने ऐसे महान पुण्य का बंध रोहिणी व्रत करके किया था , उस व्रत की महिमा इस नाटक में दिखाई गयी है | वीर नि. सं. २५०२ , सन् १९७६ में यह नाटक लिखा गया है |