02.1 कर्म का स्वरूप एवं कर्मबंध की प्रक्रिया
कर्म का स्वरूप एवं कर्मबंध की प्रक्रिया कर्म का अस्तित्व इस विशाल जगत् और अपने जीवन में जब हम झांककर देखते हैं, तो हमें अनेक विविधता दिखाई पड़ती है। जगत् विविधताओं का केन्द्र है, तथा जीवन विषमताओं से घिरा है। जगत् में कोई सुखी, कोई दु:खी, कोई निर्धन, कोई धनवान, कोई ऊँच, कोई नीच, कोई...