चतुरंग!
चतुरंग Bowing down with bending both hands and knees, Four parts of an army. नमस्कार का एक प्रकार अर्थात् सोनोन हाथ व दोनों घुटने नमाना , सेना के और अंग; अश्र्व , हज , रथ और पैदल सैनिक ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुरंग Bowing down with bending both hands and knees, Four parts of an army. नमस्कार का एक प्रकार अर्थात् सोनोन हाथ व दोनों घुटने नमाना , सेना के और अंग; अश्र्व , हज , रथ और पैदल सैनिक ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्करवर सागर – Puskaravara Sagara. An ocean surrounding Pushkarvardvip (island). पुष्करवरद्वीप की घेरे हुए एक समुद्र “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावपुरुष – Bhavapurusha. Psychologically male one. पुरुष वेद के उदय से पुरुष की अभिलाषा रूप मैथुन संज्ञा का धारक जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषत्त्व – Purusattva. Man hood, Manliness, Virility. पुरुषता- पुरुषपने के समस्त गुणों से युक्त “
देशस्पर्श Binding of two matters (or of their particles). एक द्रव्य के देश अर्थात् अवयव का अन्य द्रव्य के देश अर्थात् उसके अवयव के साथ स्पर्श करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसंग्रह – Puranasamgraha. Name of books pertaining to the life history of Jaina-Lords. आचार्य दामनन्दि, श्रीचन्द्र आदि आचार्यों द्वारा २४ तीर्थंकरों के जीवन चरित्र के आधार पर रचित इस नाम के कई ग्रंथ हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञाभाव छेदना – Pragyaabhaava Chhedanaa. Sagacious knowledge related to 6 entries (dravyas). मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्ययज्ञान और केवलज्ञान के द्वारा छह द्रव्यों का ज्ञान होना “
देवकृत अतिशय Fourteen excellences (extraordinary occurrences) of Lord Arihant (done by deities). तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में से 14 अतिशय जो देवों द्वारा किये जाते हैं, जैसे- संख्यात योजनों तक वन असमय में ही पत्र, फूल और फलों की वृद्धि से संयुक्त हो जाते हैं, कंटक और रेती आदि को दूर करती हुई सुखदायक वायु…
देवता Lord, Deities, Celestial beings. अर्हंत ; सिद्ध आदि भगवान अथवा स्वर्ग में रहने वाले देव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]