गृहीत मिथ्यात्व!
गृहीत मिथ्यात्व Wrong conception (acquired by the false speech). दूसरे के द्वारा मिथ्या उपदेश सुनकर जीवादि पदार्थों के विषय में जो मिथ्या श्रद्धान रूप भाव उत्पन्न होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गृहीत मिथ्यात्व Wrong conception (acquired by the false speech). दूसरे के द्वारा मिथ्या उपदेश सुनकर जीवादि पदार्थों के विषय में जो मिथ्या श्रद्धान रूप भाव उत्पन्न होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्वीप कमार A type of deities (having abodes). भवनवासी देवों का एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चंद Some, a few, one or two, Name of a summit and its deity. कुछ, थोडा , अपर विदेह मने स्थित देवमाल वक्षार का एक कूट व देव ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ईर्यापथिक A type of repentance (Pratikraman). 7 प्रकार के प्रतिक्रमणों में एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुप्तिश्रुति” Name of the disciple of Vinayandhara and the teacher of Guptiriddhi. विनयंधर के शिष्य तथा गुप्तिऋद्धि के गुरु .समय -ई.१३ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुप्तिसागर(उपाध्याय) Name of the disciple of Acharya Shri Vidyasagar Maharaj, who got Upadhyay rank from Acharya Shri Vidyanand Maharaj. आचार्यश्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित एक मुनि (ई.श. २०-२१), इन्होने आचार्यश्री विद्यानंद महाराज से उपाध्याय पद प्राप्त किया ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मक्सी पार्श्वनाथ (तीर्थ) – Makshi Parshvanatha (Tirtha).: Name of a Jaina place of pilgrimage, an Atishay Kshetra of Lord Parshvanath in M.P. मध्य प्रदेश में सेंट्रल रेलवे की भोपाल – उज्जैन शाखा पर अवस्थित एक अतिशय क्षेत्र ” यह क्षेत्र भगवान्पार्श्वनाथ की प्रतिमा के अतिशयों के कारण अतिशय क्षेत्र कहलाता हैं “
उदयचन्द्र Name of an Acharya of Nandi group, Name of a poet. नन्दी]संघ (देशीयगण) की नयकीर्ति शाखा के एक गुरू अपभ्रंश कवि इनकी प्रधान कृति सुअंधदहमीकहा है (समय ई. सन् ११५० ११९६) ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ग्रीवोर्ध्वनयन An infraction in the posture of meditation, raising head upward. कायोत्सर्ग का एक अतिचार ; ग्रीवा को ऊपर उठाना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्तच्छद – Saptacchada. Name of the initiation & omniscience tree of Lord Ajitnath & Dharmanath. 7 पत्रों के स्तंबको से युक्त एक वृक्ष, सप्तपर्ण का अपरनाम। तीर्थकर अजितनाथ एवं धर्मनाथ ने इसी वृक्ष के नीचे दीक्षा ली थी और केवलज्ञान प्राप्त किया था।