पर संग्रहाभास!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पर संग्रहाभास :False, conception related to the existence of supreme spirit only.केवल सत् है’ अन्य कुछ नहीं ऐसा कहना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पर संग्रहाभास :False, conception related to the existence of supreme spirit only.केवल सत् है’ अन्य कुछ नहीं ऐसा कहना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शय्या – Shyyaa. Suitable resting place of saints. भक्तप्रत्याख्यान सल्लेखना के 40 अधिकारों में 25 वां अधिकार, आराधक योग्य वसतिका “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदल – Vidala. Pulses (having two parts ) mixed with raw milk or curd, it is not edible according to Jaina phi-losophy. द्विदल; कच्चे दूध – दही – मट्ठा के साथ द्विदल (दो दल वाले दलहन ) पदार्थों के साथ मुख्य की लार का संबंध होने से असंख्य स्म्मुर्छन जीव राशि पैदा…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयमलब्धि – स्थान – Sanyamalabdhi – Sthana. The stage for the attainment of restraints. जिस अवस्था विशेष में संयम लब्धि ठहरती हैं “
त्रसनाड़ी A channel or tunnel of mobile beings. लोक के बहु मध्य में एक राजु लम्बा और कुछ कम तेरह राजु ऊंचा बस जीवों का निवास क्षेत्र । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == कर्म-मुक्ति : == पक्के फलम्हि पडिए, जह ण फलं बज्झए पुणो विंटे। जीवस्स कम्मभावे, पडिए ण पुणोदयमुवेइ।। —समयसार : १६८ जिस प्रकार पका हुआ फल गिर जाने के बाद पुन: वृन्त से नहीं लग सकता, उसी प्रकार कर्म भी आत्मा से विमुक्त होने के बाद पुन: आत्मा (वीतराग) को…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मुमुक्षु : == मिच्छत्तासवदारं रुंभइ सम्मत्तदिढकवाडेण। हिंसादिदुवाराणि वि, दिढवयफलिहेहिं रुंभति।। —जयधवला : १-१०-५५ मुमुक्षु जीव सम्यक्त्व रूपी दृढ़ कपाटों से मिथ्यात्व रूपी आस्रव द्वार को रोकता है तथा दृढ़ व्रत रूपी कपाटों से हिंसा आदि द्वारों को रोकता है।