रसवाणिज्य!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसवाणिज्य – मक्खन, लोनी आदि का व्यापार Rasavanijya-Business of dairy product
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसवाणिज्य – मक्खन, लोनी आदि का व्यापार Rasavanijya-Business of dairy product
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसंघ – Sarvasangha. Name of the 58th chief disciple of Lord Rishabhdev. भगवान ऋषभदेव के 58 वें गणधर ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वमत – Sarvamata. Something universally accepted. जो सर्वरूप मान्य हो ।
चैत्य भूमि The land for temple (related to eternal Jain idols). भवनवासी आदि सभी देवों के जिनमंदिरों में चैत्यभूमि होती है जो अकृत्रिम जिनप्रतिमा से युक्त होती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वचंद्र – Sarvachandra. Name of a saint of Nandi group, the disciple of Vasumandi. न्ंदिसंघ के देषीयगण की गुर्वावली के अनुसार वसनंदि के षिष्य तथा दामनंदि के गुरू । समय-ई0 918-948 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राक्षस देव – व्यंतर जातीय देवो के 8 भेदो में एक भेद। Raksas (deva)-A type of peripatetic deities
चूलितांग A time unit. काल का एक प्रमाण , ८४ लाख प्रयुत प्रमाण काल ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्प – Sarpa. A snake a serpent, a significant symbol of lord Parshvanath, The presiding deity of a lunar Ashlesha. भगवान पाश्र्वनाथ का चिन्ह, सातवें नक्षत्र आश्लेषा का अधिपति देवता।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगदेव – बारस अणुुवेक्खा के रचियता एक अपभ्रंष कवि ई्र ष 15 मध्यपाद, तत्वार्थ सूत्र टीका के रचियता एक भटट्ारक ई सन् 1570 Yogadeva-Name of some great personalities
चित्सुखाचार्य Name of a promoter of Vedant literature. वेदान्त स्दाहित्य प्रवर्तक (ई. १२५०) जिन्होंने ‘चित्सुखी’ नामक ग्रन्थ रचा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]