प्रश्नोत्तर श्रावकाचार!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रश्नोत्तर श्रावकाचार- आचार्य सकलकीर्ति (र्इ. 1406- 1442) द्वारा रचित एक ग्रंथ। Prasnottara Sravakcakara- A book written by acharya Sakalkirti
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रश्नोत्तर श्रावकाचार- आचार्य सकलकीर्ति (र्इ. 1406- 1442) द्वारा रचित एक ग्रंथ। Prasnottara Sravakcakara- A book written by acharya Sakalkirti
[[श्रेणी:शब्दकोष]] फालि द्रव्य- समुदाय रुप कर्म निशेकों का खण्ड। Phali Dravya- A part of karmic aggregates
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राहू – ज्यातिश के मुख्य 9 ग्रहो में 8 वां ग्रह जन्मकुंडली में राहु ग्रह से अनिश्ट होने पर उसके निवारण हेतू भगवान नेमिनाथ की उमासना की जाती है। Rahu-An astrological planet
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्लक्षणकूला – सिखरी पर्वत के कूट तथा देवी का नाम Plaksanakula- Name of a summit and female deity of shikhari mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ल्क्षण निमित्तज्ञान – अश्टांग निमित ज्ञान का छठा अंग, षारिरिक चिन्ह देखकर मनुश्य के ऐष्वर्य व दरिद्री आदि का ज्ञान होना। Laksana Nimittajnana-A type of knowledge gained through different marks of the body
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्रांति – Sankraanti. Transition, Change. संचार, गमन, परिवर्तन ” इसके अर्थ, व्यंजन, योग संक्रांति तीन भेद हैं ” यह परिवर्तन प्रथम शुक्लध्यान पृथत्तववितर्क वीचार में होता है ” प्रत्येक मास में सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संचार करना भी संक्रांति कहलाता है “
दंषमशक – परीषह To tolerate insect-bite affliction. 22 परीषह में एक परीषह , मच्छर , मक्खी, बिच्छू, चींटी आदि के द्वारा की गयी बाधा को बिना प्रतिकार किये सहन करना एंव मन, वचन, काय से उनको बाधा न पहुंचना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधस्वामित्व- कर्म सिद्धान्त विषयक एक ग्रंथ। Bandhasvamitva- Name of a book
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संसार : == धिक् संसारं यत्र, युवा परमरूपर्गिवतक:। मृत्वा जायते, कृमिस्तत्रैव कलेवरे निजके।। —समणसुत्त : ५११ इस संसार को धिक्कार है, जहाँ परम रूप-र्गिवत युवक मृत्यु के बाद अपने उसी त्यक्त मृत शरीर में कृमि के रूप में उत्पन्न हो जाता है। न नास्तीहावकाशो, लोके बालाग्रकोटिमात्रोऽपि। जन्ममरणबाधा, अनेकशो…