वितस्ति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वितस्ति – Vitasti.: A type of palm measurement. एक बालिश्त “12 अंगुल की लम्बाई का माप या हाथ को पूरा फैलाकर अंगूठे से कनिष्का तक की दूरी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वितस्ति – Vitasti.: A type of palm measurement. एक बालिश्त “12 अंगुल की लम्बाई का माप या हाथ को पूरा फैलाकर अंगूठे से कनिष्का तक की दूरी “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंत्रशाला: A part of the palaces of astrological deities. ज्योतिष देवों के प्रासादों में एक कक्ष अथवा जिसमें राजा अपने मंत्रियों के साथ मन्त्रणा करते हैं वह कक्ष “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजयाचार्य – Vijayaachaarya.: An Acharya, the disciple of Baldevsuri. अपरनाम अपराजित ,बलदेवसूरि के शिष्य एक आचार्य ,इन्होनें भगवती आराधना पर विस्तृत संस्कृत टीका लिखी है “समय –शक सं. 658 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सदभूत व्यवहार नय – Sadbhuuta Vyavahaara Naya. A standpoint describing something with differentiation in virtues and virtuous one. व्यवहार नय है।
दूरास्वादित्व ऋद्धि Super distantial attainment of taste. जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को रसना इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित खटटे, मीठे आदि अनेक प्रकार के रसों का स्वाद लेने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजयगुप्त – Vijayagupt.: Name of the 31st chief disciple of Lord Rishabhdev. तीर्थंकर ऋषभदेव के 31वें गणधर “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] म:The 25th consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का पचीसवाँ व्यंजन इसका उच्चारण स्थान ओष्ट और नासिका है “
दूर श्रवणत्व ऋद्धि A super distantial power of hearing. बुद्धि ऋद्धि का एक प्रकार जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को श्रोत इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित ध्वनि या शब्दों को सुनने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विक्रिया ऋद्धि – Vikriyaa Riddhi.: A kind of supernatural power of transforming body shape. एक प्रकार की ऋद्धि ; जो तपस्या से प्राप्त होती है इसके 8 भेद हैं – अणिमा , महिमा ,गरिमा ,लघिमा ,प्राप्ति,प्राकाम्य ,ईशित्व ,वशित्व “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विकलेन्द्रिय- Vikalendriya.: Two-sensed, three-sensed or four-sensed beings (deficient-sensed). दो इन्द्रिय ,तीन इन्द्रिय और चार इन्द्रिय जीवों को विकलेन्द्रिय या विकलत्रय कहते हैं “