देवायु कर्म!
देवायु कर्म Celestial life-span Karma, Celestial Longevity determining Karma. आयु कर्म का एक भेद जिसके उदय से जीव निश्चित समय तक देव शरीर में रूका रहे।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवायु कर्म Celestial life-span Karma, Celestial Longevity determining Karma. आयु कर्म का एक भेद जिसके उदय से जीव निश्चित समय तक देव शरीर में रूका रहे।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाटला:Name of the initiation tree of Lord vasupujyanath.पद्यपुराण के अनुसार वासुपूज्यनाथ भगवान के दीक्षा वृक्ष का नाम (इसका नाम महापुराण के अनुसार कदम्ब है)।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांडुकंबला शिला:Name of a shila (very auspicious large stone at sameru mountain) pertaining to the lustral bath of Jaina Lord of weatern videk kshetra (region).सुमेरु पर्वत पर एक शिला, जिस पर पश्चिम विदेह के तीर्थकरो का जन्म कल्याणक संबंधी अभिषेक किया जाता हैं।
उपशमावली Subsidential time (the smallest). जिस आवली में कर्म का उपशम हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विमलसागर (आचार्य) – Vimalasagara (Acharya). Name of a famous Digamber Acharya of 20th century, the chief diaciple of Acharya Mahavirkiti. आचार्य श्री महावीरकीर्ति महाराज के प्रमुख शिष्य एवं एक प्रभावक आचार्य ” इनकी प्रेरणा से सम्मेदशिखर में समवसरण मंदिर, तीस चौबीस मंदिर आदि निर्माण हुए तथा अनेक तीर्थों पर नवनिर्माण के साथ…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्पराभाव:Mutual non-existence of matters.एक द्रव्य में दूसरे द्रव्य का अभाव होना।
त्रिधाकरण Three divisions of wrong (false) Karmas. मिथ्यात्व के तीन खंड करने की विधि को त्रिधाकरण कहते हैं मिथ्यात्व , सम्यक्मिथ्यात्व, सम्यक्प्रकृति। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तेईस वर्गणा 23 variforms or aggregates of karmic molecules. अणु वर्गणा, संख्याताणुवर्गणा, असंख्याताणुवर्गणा आदि 23 प्रकार की बर्गणाएं होती हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीर नामकर्म – Shareera Naamkarma. Physique making Karmic nature causing formation of complete body. जिसके उदय से औदारिक आदि शरीर की रचना हो “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेरुपंक्ति व्रत–Merupankti Vrat. A particular type of fasting. 5 मेरु संभंधी 80 चैत्यालयो के व्रत इसमें 80 उपवास और 20 वन संभंधी 20 बेला किए जाते है”