भूतपूर्व नय!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतपूर्व नय – Bhutapurva Naya. A standpoint related to the past events. अतीत कालीन पर्यायों की अपेक्षा कथन करने वाला नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतपूर्व नय – Bhutapurva Naya. A standpoint related to the past events. अतीत कालीन पर्यायों की अपेक्षा कथन करने वाला नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भरतेशवैभव – Bharatesavaibhava. Name of a book written by a poet Ratnakar. कवि रत्नाकर (ई.१५५१) कृत एक ग्रंथ “
गुणोपचार Change of nature with respect to association of different virtues. कार्यविधि , स्नान , गुणों के साहचर्य से आत्मा भी गुणसंज्ञा को प्राप्त होती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्तव्यसन चारित्र – Saptavyasana Chaaritra. Name of a book written by Manranglal. पंडि़त मनरंगलाल (ई. 1850-1890) द्वारा रचित भाषा छंदबद्व कथा।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नमती – बीसवी सदी की एक प्रसिद्ध आर्यिका,जो गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की गृहस्थावस्था की मा थी।सन् 1924 मे इनका जन्म महमूदाबाद में हुआ, इन्होंने अपने विवाह में पिता से दहेज मे प्राप्त पùनंदी पंचविंषतिका ग्रथ का स्वघ्याय करके अपने जीवन को सुसंस्कृत किया। जिसके फलस्वरूप इनकी संन्तानो में भी त्याग के बीज…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजवर द्वीप – सागर – Bhujavara Dvipa Sagara. Name of an island and ocean of middle uni-verse. मध्यलोक में स्थित एक द्वीप व समुद्र का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्त ऋषि – Sapta Risi. Group of 7 particular saints, who were real brothers. चारण ऋद्विधारी 7 विषेष मुति-सुरमन्यु, श्रीमन्यु, श्रीनिचय, सर्वसुन्दर, जयवान्, विनयलालस और जयमित्र। उत्तम तप के कारण सातो भाई सप्त ऋषि कहलाये। इनके प्रभाव से मथुरा नगरी मे चमरेन्द्र यक्ष द्वारा प्रसारित महामारी रोग नष्ट हुआ था।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नप्रभ – रूचक पर्वत का एक कूट Ratnaprabha- Name of a summit situated at Ruchak Mountain
गुरुपरंपरा Tradition of Spiritual Teachers (Acharyas). आचार्य परमपरा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगप्रतिक्रमक – पंचवर्शीय प्रतिक्रमण, 5 साल में सामूहिक रूप से साधुओ द्वार किया जाने वाला प्रतिक्रमण Yugapratikramana-A religious observance (repentance) to be performed by saints in every 5 year