योजन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योजन – क्षेत्र का प्रमाण विषेश। 4 कोस का एक लघु योजन, दो हजार कोस का एका महायोजन होता है। Yojana-A large measurement unit of area
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योजन – क्षेत्र का प्रमाण विषेश। 4 कोस का एक लघु योजन, दो हजार कोस का एका महायोजन होता है। Yojana-A large measurement unit of area
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतगुरु – Shrutaguru. Spiritual preceptor. जो प्रायश्चित देकर संवेग व वैराग्य जनक परमागम के वचनों द्वारा साधु का संवरण करते है वो निर्यापक है ” उन्हें ही शिक्षा गुरु या श्रुत गुरु भी कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संस्तवक – Sanstavaka. The 2nd Patal (layer) of the 2nd hell. दूसरे नरक का दूसरा पटल “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्तासंख्यात – असंख्यात के तीन भेदो में एक भेद, इसके उत्तम, मध्यम जघन्य तीन भेद है। Yuktasamkhyata-A unit of uncountable numbers
आन्तरिक सज्जा Interior decoration or furnishing. भीतरी सजावट।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ब- देवनागरी वर्णमाला का तेर्इसवाँ व्यंजन, इसका उच्चारण दोनों ओठों को मिलाकर किया जाता है। Ba- The 23rd constant of the devnagri syllabus
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्ष्मण – राजा दषरथ के पुत्र, राम के भाई, आठवे नारायण, इन्होने कोटिषिला उठाई थी।लक्ष्मण का राम के प्रति भ्रात प्रेम संसार में प्रचलित है। Laksamana-The younger brother of lord Ramchandra
इंद्रियजय Sensual restraint, subjugation. पाँचों इन्द्रियों को ज्ञान वैराग्य उपवास आदि के द्वारा वस में रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संस्कारमालारोपण – Sanskaara Maalaaropana. A particular kind of ritual procedure of attributing virtues to the idol of Jaina-Lord, to be observed by Saudharma Indra. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में केवलज्ञान कल्याणक के दिन प्रतिमा के ऊपर सौधर्म इन्द्र द्वारा की जाने वाली एक विशेष विधि, जिसमें प्रतिमा के ऊपर विविध संस्कारों का आरोपण किया जाता है…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघुसर्वज्ञ सिद्धि – आचार्य अनंन्तकीर्ति कृत संस्कृत भाशा का न्याय विशयक गं्रथ। Laghusarvajna Siddhi-Name of a book written by Acharya Anantakirti