यषोधचरित्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोधचरित्र – वादिराज द्वि ई 1010 – 1065 कृत, कवि पùनाथ ई 1405 – 1425 कृत, सकलकीर्ति ई 1406 – 1442 आदि विद्वानो द्वारा इस विशय के कइ ग्रन्थ रचे गए है। Yasodharacaritra-A character portrayal by many writers
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोधचरित्र – वादिराज द्वि ई 1010 – 1065 कृत, कवि पùनाथ ई 1405 – 1425 कृत, सकलकीर्ति ई 1406 – 1442 आदि विद्वानो द्वारा इस विशय के कइ ग्रन्थ रचे गए है। Yasodharacaritra-A character portrayal by many writers
तीर्थंकर भक्ति Name of a book written by Acharya Samant-bhadra. आचार्य समंतभद्र (ई. 120-185) ककृत स्तुति विद्या भक्ति स्तोत्र, अपरनाम जिनशतक। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वापर अविरोध – Purvapara Avirodha. State devoid of mutual contradiction. परस्पर विरोध से रहित होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकीर्णक – Prakirnaka. Another name of Angabahyashrut, part of shrutgyan (scriptural knowledge), Scattered heavenly abodes and dwelling places of hell are called Prakirnak. अंगबाहाश्रुत का अपरनाम – इनके १४ भेद हैं, स्वर्ग में बिखरे हुए विमान एवं नरकों में बिखरे हुए बिल “
ऊह Elimination, Reasoning, Inductive reasoning.तर्क के द्वारा पदार्थ के स्वरूप का जानना यह श्रोता के 8 गुणों में से एक है।[[श्रेणी:शब्दकोष]] या A time unit, Inductive reasoning. काल का एक प्रमाण 84 लाख ऊहांग प्रमाण काल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नपुरी तीर्थ – तीर्थकर घर्मनाथ भगवान की जन्मनगरी का नाम, ये वर्तमात में उ प्र के फैजाबाद जिले में स्थित है।सती मनोवती की गजमोती चढाकर जिनेन्द्र भगवान के दर्षन करने की प्रतिज्ञा यही पूर्ण हुयी थी। इसे रौनाही के नाम से भी जाना जाता है। Ratnapuri(Tirtha)-Name of a place of pilgrimage, The birth place…
उराल Liberal, Bulky, Noble . उदार, स्थूल, महान, उराल ये शब्द एकार्थवाची है, औदारिक शरीर को अवगाहना की अपेक्षा उराल कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्षणाभास – मिथ्या अर्थात सदोश लक्षण। Laksanabhasa-faulty characteristics (A fallacy)
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हैरण्यवत् (क्षेत्र) – Hairanyavat (Ksetra). Name of the 6th region in all the 7 regions of Jambudvip (island). जम्बूद्वीप के 7 क्षेत्रों मे छठा क्षेत्र। यहाॅ जधन्य भोगभूमि है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगादि पुरूश – कुलकर, युग के आदि में होने से इन्हेही युगादि पुरूश कहते है ये मुख्यत 14 होते है। Yugadi Purusa-The great personalities (Kulkars) in the beginning of the era