पण्हसवण!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पण्हसवण:Another name Dharsenacharya. धरसेनाचार्य का ही दूसरा नाम , क्योकि प्रज्ञाश्रमण का प्राकुत रूप पण्हसवण है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पण्हसवण:Another name Dharsenacharya. धरसेनाचार्य का ही दूसरा नाम , क्योकि प्रज्ञाश्रमण का प्राकुत रूप पण्हसवण है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरशासन जयंती व्रत –VirasasanaJayanintiVrata. A vow (fasting) on Shravan Krishna. 1, the first auspicious day on which the resonant preaching (DivyaDhvani) of Lord Mahavira was delivered. भगवन महावीर की दिव्यध्वनी की प्रथम तिथि श्रावण कृ.१ उपवास करना ” ‘ॐ’ ह्रीं श्री महावीरराय नम:’ इस मंत्र का जाप्य करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पक्षाभास: Fallacious arguments. मित्याप्रक्ष -इष्ट, असक्ष् िऔर अबाधित इन विषेषणो से विपरीत अनिष्ट, सि़द्व व बाधित पक्षाभास है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुमुक्षु–Mumukshu. Those desirous of salvation or liberation. मोक्ष की इच्छा करने वाले भव्य जीव” समयसार में निर्ग्रन्थ दिगंबर मुनिओ को मुमुक्षु कहा है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य भूमि – Saamaanya Bhoomi. Gircular land in the assembly of Lord Arihant (with 20,000 stairs in every direction). समवसरण के 31 अधिकारों में प्रथम अधिकार । समवशरण में सामान्य भूमि गोल होती है। उसकी प्रत्येक दिशा में आकाश में स्थित 20-20 हजार सीढि़याॅं है।
एक करवटनिद्रा An austerity, Sleeping with the single posture. कायक्लेश का भेद- एक करवट से सोना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूगोल – Bhugola. Geography. जैनाभीमत में मध्यलोक- जंबुद्वीप आदि ब्रह्रांड का वर्णन विषय भूगोल में है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य छल – Saamaanya Chhala. General cheating or deceitful behavior. छल के तीन भेद वाक्छल, सामान्य छल व उपचार छल में एक भेद । सम्भावना मात्र से कही गयी बात को सामान्य नियम बनाकर वक्ता के वचनों के निषेध करने को सामान्य छल कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाजातरूपधर–Yathajaatrupadhar. One having natural form without any worldly attachment. व्यवहार से नगन्पने एवं निश्चय से जो आत्मा का स्वरुप है उसे जोधारणकरता है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषयसंरक्षणानंद – Vishayasamraksananamda. Intense passionate attachment. एक प्रकार का रौदृ ध्यान, परिग्रह व इन्द्रिय भोग के पदार्थों की रक्षा में मोह करते रहना चौथा रौदृध्यान हैं “