निदान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निदान-भोगों की तृष्णा से पीडित होकर रातदिन आगामी भोगों को प्राप्त करने की ही चिन्ता करते रहना निदानज नामक आर्त्तध्यान है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निदान-भोगों की तृष्णा से पीडित होकर रातदिन आगामी भोगों को प्राप्त करने की ही चिन्ता करते रहना निदानज नामक आर्त्तध्यान है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभ प्रत्याख्यान –Lobha Pratyaakhyaana. Renunciation of greed . सत्यव्रत की रक्षार्थ एक भावना ;लोभ के त्याग की भावना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकालोक विभाग – Lokaaloka Vibhaag.: The universal & non –universal spaces. आकाश द्रव्य के लोक और आलोक का विभाग अर्थात् लोकाकाश और अलोकाकाश “
उपसंपदा Submission . साधुओं के औधिक समाचार का एक भेद गुरूओं को आत्म समर्पण कर आज्ञानुसार आचरण करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहारक द्विक् Dyad assimilation pertaining to Aharak Sharir. आहारक शरीर आहारक अंगोंपांग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वृत्ति – Nirvrtti. Formative sense, Subtype of physical sense. नामकर्म के द्वारा होने वाली रचना विशेष (इंद्रिय) को निर्वृत्ति कहते है ” जसे-आँख की पुतली आदि “
दार्शनिक श्रावक See – Dar¹ana ©råvaka. देखें – दर्शन श्रावक।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुद्धि – Buddhi. Wisdom, Intelligence. ज्ञान, जिसके द्वारा समस्त पदार्थ के बारे में जाना जाता है “
आहार वर्गणा Physique making Karmic nature causing complete formation of the body. देखें-आहारक वर्गणा।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आर्षयज्ञ Oblation-particular auspicious articles offering into the sacred fire. तीर्थंकर गणधर तथा अन्य केवलियों के शरीर संस्कार हेतु अग्रिकुमार इन्द्र के मुकुट से उत्पन्न त्रिविध अग्नियों के प्रतीक में हवन कुण्ड बनाकर मंत्रों के उच्चारण पूर्वक भक्तिसहित धूप सप्त धान्य घी आदि से आहुति देना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]