तत्वचिंतन!
तत्वचिंतन Act of deep thinking over 7 tattvas (matters). शुभोपयोग सात तत्वों का मनन करना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वचिंतन Act of deep thinking over 7 tattvas (matters). शुभोपयोग सात तत्वों का मनन करना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ललित कीर्ति – यषकीर्ति न 3 के गुरू और रत्ननंदी द्वि के षिक्षा गुरू। समय ई – 1214, काश्ठसंघी जगतकीर्ति के षिश्य एक मंत्रवादी। कृति महापराण टीका। नंन्दीष्वर व्रत आदि 13 कथाएं। Lalitakirti-Name of saints-(1) Spiritual teacher of ratnanandi-II (2) The disciple of Jagatkirti of Kashtha Group
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शांतिनाथ चारित्र – Shantinaatha Chaaritra. Name of a book written in Sanskrit language. संस्कृत भाषा बद्ध एक ग्रंथ “
उपादान कारण(क्षणिक) Affluent cause (momentary). क्षणिक रूप से उपादान कारण होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रश्मिवेग – पुश्कलावती के विजयार्ध पर त्रिलोकोत्तम नगर के राजा विद्युतगति का पुत्र था।युवावस्था में दीक्षित हुआ, योग में लीन स्थिति में एक अजगर निगल गया।समाधिपूर्वक मरने से अच्यूत स्वर्ग के पुश्कर विमान मे देव हुअ्रा। Rasmivega-The son of kind Vidyutgati of Trilokottam city situated in Pushkalavati country of Vijayardh mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोहाचार्य –Lohaacharya.: Name of a great Acharya in the era of Lord Mahaveera . महावीर भगवान के निर्वाण के 565 वर्ष बाद हुए आचारान्गधारी चार आचार्यों में चौथे आचार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निवृत्ति – Nivrtti. Devoid of all desires, Datachment from worldly life, Abstinence. समस्त अभिलाषाओं कस त्यग करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवाह – Sanvaha. A type of township; prosperous place. नगरों का एक प्रकार ” जहां मस्तक तक ऊचें ऊचें धान्य के ढेर लगे रहते हैं वेह संवाह नगर कहलाता हैं ” समुन्द्र की बेला से वेसिस्ट स्थान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभ प्रत्याख्यान –Lobha Pratyaakhyaana. Renunciation of greed . सत्यव्रत की रक्षार्थ एक भावना ;लोभ के त्याग की भावना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविन्द्र कुमार बह्यचारी – गणिनिप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के एक प्रमुख षिश्य जम्बद्वीप रचना हस्तिनापुर के प्रमुख स्तम्भ।सन् 1972 में आजन्म ब्रहमचार्य व्रत लेकर क्रमष घर्मक्षेत्र में अथक परिश्रम करके माताजी की प्रेरणा से जम्बुद्वीप हस्तिनापर, तपस्थली प्रयाग, कुण्डलपुर, मांतुगा, अयाध्या एवं अनेक तीर्थ क्षेत्रो का विकास करते हुए जैन धर्म की संस्क्ति का…