पुंडृ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुंडृ – Puindra. A type of sugarcane, Northem part of Bengal, A country of Bharat Kshetra in the east Aryakhand (region). एक प्रकार का गन्ना, वर्तमान बंगाल का उत्तर भाग, भरत क्षेत्र पूर्व आर्यखण्ड का एक देश “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुंडृ – Puindra. A type of sugarcane, Northem part of Bengal, A country of Bharat Kshetra in the east Aryakhand (region). एक प्रकार का गन्ना, वर्तमान बंगाल का उत्तर भाग, भरत क्षेत्र पूर्व आर्यखण्ड का एक देश “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशुध्दता – Vishuddhata. Genuineness, Purity, Sacredness. पवित्र, निष्कलंकता “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्यात् : == नियमनिषेधनशीलो निपातनाच्च य: खलु सिद्ध:। स स्याच्छब्दो भणित:, य: सापेक्षं प्रसाधयति।। —समणसुत्त : ७१५ जो सदा नियम का निषेध करता है और निपात रूप से सिद्ध है, उस शब्द को ‘स्यात्’ कहा गया है। यह वस्तु को सापेक्ष सिद्ध करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र (स्वर्ग) – Shukra (Svarga). The 9th Kalp (heaven)among all 16. 16 कल्पों में 9वां कल्प या स्वर्ग ” यहाँ के देवों की उत्कृष्ट आयु 16 सागर है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचाचार – Panchaachaara. Five kinds of special right conducts observed by Jaina Acharya. सम्यग्दर्शनाचार, ज्ञानाचार, चारित्राचार, तपाचार, और वीर्याचार ये पंचाचार कहे जाते हैं” जैन आचार्य इनका प्रमुखतासे पालन करते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव – स्वभाव – Vibhava – Svabhava. Nature contrary to the real nature. कर्मबंध के प्रकरण में रागादि परिणाम भी अशुद्ध निश्चयनय से जीव के स्वभाव कहे जाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचनिक आस्रव– Vaachanika Aasrava.: Karmic influx caused due to auspicious & inauspicious speeches. शुभ-अशुभ वचनों से होने वाला शुभाशुभ कर्मास्रव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीलसप्तमी व्रत – Sheelasaptamee Vrata. A kind of fasting foe 7 years with specific procedure. सात वर्ष तक प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल 7 को उपवास तथा णमोकार मंत्र त्रिकाल जाप करना “