त्रिभंगी!
त्रिभंगी Three types of Karmic nature. कर्म प्रकृतियों के तीन भेद – बंध , उदय, सत्ता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिभंगी Three types of Karmic nature. कर्म प्रकृतियों के तीन भेद – बंध , उदय, सत्ता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुमतिकीर्ति – Sumatikeerti. Name of a Bhattarak of Nandi group. नंदिसंघ बलात्कार गण ईडर गद्दी के एक भट्टारक । कृतियां पंचसंग्रह की संस्कृत वृत्ति , ज्ञानभूषण के साथ मिलकर ’क्रम प्रकृृति’ की टीका लिखी ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारामार्थिक प्रत्यक्ष – Paramarthika Pratyaksha. Direct & supreme perception, transcendental knowledge. जो ज्ञान बिना किसी की सहायता से पदार्थ को स्पष्ट जानता है. सकल ज्ञान अर्थात् केवलज्ञान एवं विकलज्ञान अर्थात् अवधिज्ञान व मनःपर्यय ज्ञान पारमार्थिक प्रत्यक्ष हैं “
धृतिभावना Steadfast; calm in nature. धैर्यरूपी परिधान धारण करना । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुकक्ष – Sukaksha. Name of the 31st city in the sourth of Vijayardh mountain. विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का 31 वां नगर ।
धृततेज A king of Kuru dynasty. कुरूवंश का एक राजा ,धृतोदय का पुत्र और धृतयश का पिता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पानी छानना- Pani Chanana. Filtration of water with cloth. जलगालन . जैन विधि के अनुसार, जब कपड़े का मोटा छत्रा दोहरा करके उससे पानी छाना जाता है, तब वह जीवरहित शुद्ध जल होता है तथा छत्रे की जीवनी करने की भी विशेष विधि होती है”
धारा नगरी Present Dhar city in Madhya pradesh, where Mantun-gacharya composed Bhaktamar Stotra. मध्यप्रदेश का एक नगर जहां के कारावासस में मानतुंग आचार्य द्वारा भक्तामर स्तोत्र की रचना हुई। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य उपधि – Bahya Upadhi. Alien – belonging (material articles). बाह्य परिग्रह,आत्मा से एकत्व को नहीं प्राप्त हुए ऐसे क्षेत्र, वास्तु, धन आदि बाह्य उपधि हैं “