प्रकृति संक्रमण!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति संक्रमण – Prakrti Samkramana. Transition of karmic species. कर्म की १० अवस्थाओं में एक अवस्था; बंधरूप प्रक्रति का अन्यरूप परिणमन होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति संक्रमण – Prakrti Samkramana. Transition of karmic species. कर्म की १० अवस्थाओं में एक अवस्था; बंधरूप प्रक्रति का अन्यरूप परिणमन होना “
धम्मरसायण A book written by a saint, Padmanandiji. मुनि पद्मनन्दि (ई.977) कृत का ग्रंथ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्विचिकित्सा – Nirvichikitsaa. To have reverential belief with free from any disgust on viewing excreta of saints. घृणा नहीं करना, सम्यग्दर्शन के 8 अंगों में तीसरा अंग; रत्नत्रयसे पवित्र साधुओं के मलिन शरीर, मलमूत्रादी से घृणा न करते हुए वस्तुस्वरूप का विचार करना ” परोपकार के निमित भी इस गुण का पालन करना चाहिए…
धनधान्य प्रमाणातिक्रम Exceeding the set limits of grains, cattle and wealth (an infraction). परिगग्रह परिमाणव्रत का एक अतिचार, धन, गाय, भैस एवं धान्य पदार्थ संग्रह के लिए की हुई मर्यादा का उल्लंघन करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यंजन पर्याय –Vyainjana Paryaya. Physical form of beings. जो स्थूल है, शब्द के द्वारा कही जा सकती है और चिरस्थायी है उसे व्यंजन पर्याय कहते हैं ” जैसे-जीव की सिध्द या मनुष्य आदि पर्याय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
आर्यिका Jaina most virtuous and adorable female ascetics are called ‘Aryika’, Name of a book written by Ganini Gyanmati Mataji. नारी जीवन के उत्कृष्ट त्याग की अवस्था।दिगम्बर मुनियों के समान ही आर्यिकाओं की विधि होती है, एक साड़ी मात्र नवधाभक्ति कहते हैं।अहिंसा आदि पांच महाव्रतों का पालन करने वाली यह कर्म शत्रु का विनाश करने…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वाणभक्ति – Nirvaanabhakti. A devotional prayer for salvation of one, A composition Composed by Acharya Kund-Kund & Acharya Pujyapad. 10 भक्तियों में एक भक्ति-आचार्य कुंद-कुंद द्वारा प्राकृत में रचित एवं आचार्य पूज्यपाद द्वारा संस्कृत में रचित “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवभिघ – Bhavabhidya. One destroyer of worldy transmigration, An epi- thet for the devotional prayer of Lord Arihant. संसार का भेदन करने वाली जिनभक्ति का विशेषण “