राग लोकेषणा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राग लोकेषणा – षुभ कर्मो से पुण्य की चाह। Ragalokesana- longing for virtuous life by auspicious karmas
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राग लोकेषणा – षुभ कर्मो से पुण्य की चाह। Ragalokesana- longing for virtuous life by auspicious karmas
चतुश्र्चारित्रसिद्ध Those who have got salvation because of four super conducts. भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा ४ चारित्र से सिद्ध होने वाले जीव ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम ग्रैवेयक – Madhyama Graiveyaka. See – Madhyama Graiveyaka. देखें – मध्यग्रैवेयक”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोम – शरीर के समस्त छिद्रो मे स्थित सूक्ष्म बाल।आदारिक षरीर में रोमो का प्रमाण 80,000,00 करोड है। Roma-Small hair in the pores in the body
ग्रन्थ A literary composition, treatise, A knot, Posses- sions (external, internal). गणधर देव से रचा गया द्रव्यश्रुत ग्रन्थ कहा जाता है . गाँठ , बंध , परिग्राही; अन्तरंग , बहीरंग के भेद से दो प्रकार का है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम असंख्यात – Madhyam Asankhyata. A mathematical term. एक गणितीय पद ” देखें – मध्यम अनंत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योषित – स्त्री, चक्रवर्ती के 14 रत्नो में एक रत्न। Yosita-A women one of the 14th Jewels of Chakravarti
चर ज्योतिष्क लोक Universe (reg. astral), space for wandering astral deities. मनुष्य लोक . ढाई द्वीप के ज्योतिष्का देव मेरु से ११२१ ईओओजन दूर रहकर उसके चारों ओर घूमते रहते हैं . इसके बाहर वे ज्योतिष्का देव गमन नहीं करते ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मधुक्रीड – Madhukrida. Name of the 5th pratinarayan. 5 वें प्रतिनारायण का नाम( अपरनाम – निशुम्भ ) “
द्रोणाचार्य The teacher of ‘Kauravas’ and ‘Pandavas’ and the father of ‘Ashvatthama’. कौरवों तथा पाण्डवों के गुरू तथा अश्वत्थामा के पिता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]