सकलचारित्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सकलचारित्र – Sakalachaaritra. Conduct devoid of all attachments & possessions. समस्त प्रकार के परिग्रह से रहित होकर 5 महाव्रतों को धारण करना सकल चारित्र है, यह मुनियों के होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सकलचारित्र – Sakalachaaritra. Conduct devoid of all attachments & possessions. समस्त प्रकार के परिग्रह से रहित होकर 5 महाव्रतों को धारण करना सकल चारित्र है, यह मुनियों के होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवचरिउ – Sambhavachariu. Name of a treatise written by poet Tejapal. कवि तेजपाल द्वारा (ई. 1443) रचित यथनाम विषयक अपभ्रंश ग्रंथ “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == काल : == स्पर्शरसगन्धवर्णव्यतिरिक्तम् अगुरुलघुकसंयुक्तम्। वर्तनलक्षणकलितं कालस्वरूपम् इदं भवति।। —समणसुत्त : ६३७ स्पर्श, गन्ध, रस और रूप से रहित, अगुरु—लघु गुण से युक्त तथा वर्तना लक्षण वाला काल द्रव्य है। जीवानां पुद्गलानां भवन्ति परिवर्तनानि विविधानि। एतेषां पर्याया वर्तन्ते मुख्यकाल आधारे।। —समणसुत्त : ६३८ जीवों और पुद्गलों में नित्य होने…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लेष संबंध – Shlesa Sambandha. Close relation (togetherness). संश्लेष संबंध, परस्पर संबंध को प्राप्त होना, जैसे काष्ठ और लाख का संबंध, दूध और जल का संबंध “
इंद्रिय व्याधि Diseases, Internal deterioration. इन्द्रिय बीमारी इन्द्रिय विषयों में आसक्ति हर्ष विषाद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतावतार (ग्रंथ) – Shrutaavtaara (Grantha). Name of two different treatises written by Acharya Indranandi & by Acharya Shreedhar. आचार्य इंद्रनंदि (ई.श. 10 -11) द्वारा रचित प्राकृत गाथाबद्ध भगवान महावीर के निर्वाण से 683 वर्ष पर्यंत की मूलसंघ की पट्टावली, आचार्य श्रीधर (ई.श. 14) द्वारा रचित प्राकृतछंदबद्ध ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्तापिधान – Sachittaapidhaana. Covering food with leaf etc. (objects having life), an infraction of vow of hospitality. सचित्त वस्तुओं अर्थात् पत्ते आदि से आहार ढांकना, अतिथि-संविभाग व्रत का एक अतिचार “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतज्ञानावरण – Shrutgyaanaavarana. Karmas obscuring the Shrutgyaana (scriptual knowledge). ज्ञानावरण कर्म का एक भेद; जो कर्म श्रुतज्ञान को आवरण करे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त संबंध आहार – Sachitta Sambandha Aahaara. Taking food mixed with other food articles having life. भोगोपभोगपरिमाण व्रत का एक अतिचार; सचित्त वस्तुओं से सम्बन्ध रखने वाले आहारपान का सेवन करना “