लांगलचित्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लांगलचित्र – परिणाम संख्या की हल के आकार की रचना लांगल चित्र कहते है। Lamgal Citra-a plough like figure
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लांगलचित्र – परिणाम संख्या की हल के आकार की रचना लांगल चित्र कहते है। Lamgal Citra-a plough like figure
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुर्यप्रज्ञप्ति – Suryapragyaapti. A part of scriptural knowledge containin description about the Sun (reg. its age, movement, family etc.) अंगश्रुत का एक भेद । दृष्टिवाद के प्रथम भेद परिकर्म में 5 प्रज्ञप्तियों का वर्णन है, उसमे यह दूसरी प्रज्ञप्ति है। इसमें 5 लाख 3 हजार पदो के द्वारा सूर्य की आयु, परिवार, वैभव, गति…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अनुमानावयव – Pancha Anumaanaavayava. Five elements of apprehensive sentences. प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहारण, उपनय और निगमन ये अनुमान वाक्य के पंच अवयव है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यगति प्रायोग्यानुपूर्वी – Manushyagati Praayogyaanupuurvi. Transmigratory state of soul as in previous shape while going towards human birth. जिस कर्म के उदय से मनुष्य गति में जाते हुए जीव के पूर्व शरीर के समान आत्मा के प्रदेशों का आकार बना रहे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूरकीर्ति – Soorakeertee. Name of Bhattarak of Nandi group. न्ंदिसंघ बलात्कारगण वारां गद्दी के एक भट्टारक भावनंदि के शिष्य , विद्याचन्द्र के गुरू । समय वि0सं0 1167 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंकप्रभा – Pankaprabhaa. That (4th) earth which has the colour of clay or mud. चतुर्थ नरक भूमि; जिसकी प्रभा कीचड़ के समान है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाजनांग जातीय कल्पवृक्ष – Bhajanamga Jatiya Kalpavrksa. A type of wish fulfilling trees (providing uten-sils). भोगभूमि में पाये जाने वाले १० कल्पवृक्षों में एक, यह कल्पवृक्ष सुवर्ण एंव बहुत से रत्नों से निमित धवल झारी, कलश, गागर आदि बर्तन प्रदान करने वाला होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिहितास्त्रव – Pihitasrava. Name of the father of Tirthankar (Jaina- Lord) Padmaprabh- Suparshvanath in past birth, Name of a Digambar Acharya. तीर्थंकर पद्मप्रभ, सुपार्श्वनाथ के पूर्व भाव के पिता, एक दिगाम्बराचार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यपर्याप्तक – अपर्याप्तक नाम कर्म के उदय से जो जीव अपने योग्य पर्याप्तियों को पूर्ण किए बिना ही ष्वास के 18 वें भाग में मरण को प्राप्त हो जाता है अर्थात जिसके एक भी पर्याप्ति पूर्ण नही होती उसे लब्ध्यप्र्याप्तक कहते है। Labdhyaparyaptaka-Absolutely, non development beings (Having very short life)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्मसाम्पराय संयम – Sukshmasaamparaaya Sanyama. Restraints with minute greediness. मोहकर्म का उपशमन या क्षपण करते हुए सूक्ष्म लोभ का वेदन करना सूक्ष्मसांपराय संयम हैं और धारक महामुनि सूक्ष्मसांपराय संयत कहलाते है।