निष्कषाय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्कषाय – Nishkashaaya. See – Nihkashaya. देखें – निःकषाय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्कषाय – Nishkashaaya. See – Nihkashaya. देखें – निःकषाय “
दूर घ्राणत्व ऋद्धि A supernatural power of super-distantial attainment of smelling . जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को घ्राण – इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित गंध जानने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिथिलाचारी – Shithilachaaree. One inactive in observing proper conduct. अपने योग्य आचरण में शिथिल श्रावक या साधु “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषध देव – Nishadha Deva. Protecting deity of a summit of Nishadh mountain. निषध पर्वत के निषध कूट का रक्षक देव “
दुषमा सुषमा काल Period of about one Korakori Sagar (a long period of crores of years) is called Dushama Sushama Kala i.e. period with misery and pleasure. अवसर्पिणी काल का चैथा और उत्सर्पिणी काल का तीसरा भेद। यह 42 हजार वर्ष कम एक कोडाकोडी सागर का होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय स्तवन – Nishchaya Stavana. See – Nishchaya Bhakti. देखें – निश्चय भक्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शासन देव – Shaasana Dieva. Ruling deities of 24 tirthankars. चौबीस तीर्थंकर भगवंतों के चौबीस शासन देव ” तिलोयण्णत्ति के अनुसार ये सभी शासन देव संबंधित तीर्थंकरों के समवसरण में रहते हैं अतः ये सम्यग्दृष्टि होते हैं” आचार्य पूज्यवाद स्वामी ने इनके लिए अर्ध्य बनाए हैं एवं अनेक प्राचीन ग्रंथों में इनके अर्ध्य के…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय भोक्ता भोग्यभाव – Nishchaya Bhoktaa Bhogyabhaava. Absolute consuption of self (self engrossment). शुद्धात्मा ही भोग्य अर्थात अनुभव करने योग्य है तथा शुद्धात्मा ही भोक्ता अर्थात् अनुभव करने वाला है, ऐसा निश्चय कर में स्थिर हो जाना ” यह मुनि अवस्था में ही घटित होता है “
दीक्षा काल Time period of Diksha (initiation or consecration). दीक्षा ग्रहण वाले आचार्य।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]