भव!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव – Bhava. World, Body form, Name of the predestined 6th Rudra. आयुनामकर्म के उदय से जीव की जो मनुष्यादि पर्याय होती है उसे भव कहते हैं, भविष्यकालीन छठे रूद्र का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव – Bhava. World, Body form, Name of the predestined 6th Rudra. आयुनामकर्म के उदय से जीव की जो मनुष्यादि पर्याय होती है उसे भव कहते हैं, भविष्यकालीन छठे रूद्र का नाम “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] स्वात्म रक्षा – Svaatma Raksaa. Self defence, the principle of non-violence. शुद्व भाव या आत्म रक्षा। आगम मे स्व और अन्य प्राणियो की अहिंसा का सिद्वान्त स्वात्म रक्षा के लिये ही है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांवत्सरिक प्रतिक्रमण – Saamvatsarika Pratikramana. A type of repentance carried on annually by jain saints. प्रतिक्रमण के 7 भेदो मे छठा भेद । देखे- वार्षिक प्रतिक्रमण।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयोपसंयत – Vinayopasamyata. Reverential & respectful welcome (of saints rtc.). अन्य संघ से आये हुए मुनियों को आसनदान, प्रियवचन, पुस्तक आदि दान करके आदर करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठित प्रत्येक वनस्पति- जिस वनस्पति का आश्रय निगोद या साधारण वनस्पति रहे। pratisthita pratyeka vanaspati – general plant life (one sensed beings)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसरण – Sansarana. Movement, Worldly wandering, birth & death cycle of beings. गमन, संसार में जन्म मरण करने का नाम संसरण है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठा विधान- प्रतिश्ठा संबंधि- विधान। pratistha vidhana – reverential procedure for consecrational celebration
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव स्थिति – Bhava Sthiti. Constant nature. जिसका जो स्वभाव है उससे च्युत न होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रघुम्नचरित्र- आचार्य सोमकीर्ति (ई. 1474) एवं आचार्य सोमाकृति (ई. 1516-1556) द्वारा रचित ग्रंथ। pradyumnacaritra – name of the books written by (1) acharya somkirti, (2) acharya shubhachandra