संकलन श्रेणी व्यवहार!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकलन श्रेणी व्यवहार – Sankalana Shreni Vyavahaara. Integral series of numbers. गणित विषयक एक संकलन व्यवहार की श्रेणी = 4+8+12+16+20+24+28+32=144 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकलन श्रेणी व्यवहार – Sankalana Shreni Vyavahaara. Integral series of numbers. गणित विषयक एक संकलन व्यवहार की श्रेणी = 4+8+12+16+20+24+28+32=144 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजीमती – जूनागढ के राजा उग्रसेन की पुत्री, जिनका विवाह राजा नेमिनाथ के साथ होने वाला था, किन्तु कारण वष नेमिनाथ के दीक्षा लेते ही राजुल ने भी कौमार्य अवस्था मे ही आर्यिका दीक्षा धारण कर ली। पुन यही नेमिनाथ भगवान के समवषरण में मुख्य आर्यिका बनी। Rajimati- Name of a chief Aryika (ganini)…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षोडशकारण भावना व्रत – Sodashakaarana Bhaavanaa Vrata. A particular & procedural vow (fasting). उत्कृष्ट 16 वर्ष, मध्यम 5 वर्ष, जघन्य 1 वर्ष तक प्रतिवर्ष भाद्रपद, माघ, व चैत्र इन 3 महीनों में कृ. 1 से लेकर अगले महीने की कृ. 1 तक 32 दिन तक 16 उपवास, 16 पारणा करना एवं “दर्शनविशुद्धयादि षोडशकारणेभ्यो नमः”…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंध विधान- प्रकृति, स्थिति, अनुभाग और प्रदेश के भेद से भेद को प्राप्त हुए बन्ध के भेदों को बंध विधान कहते है। Bandha Vidhana- Constitution of Karmic binding
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाभ – इच्छित अर्थ की प्राप्ति का नाम लाभ है। Labha-Profit, Gain, Desirable Attainment
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड्दिक् गति – Saddika Gati. Six directional motion of beings, binded with Karmas. कर्मबद्ध जीवों का कर्मनिमित्तक षट्दिक अर्थात 6 दिशाओं में गमन होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रासुक- जिसमे से एकेनिद्रय स्थावर जीव निकल गये हैं वह प्रासुक द्रव्य कहलाता है। Prasuka- Sterilized, boiled water, milk etc.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्खंडागम – Satkhandaagama. Six parts of great Jaina philosophical literature containing Karmic theory. कर्म सिद्धांत विषयक ग्रंथ; इसकी उत्पत्ति मूल द्वादशांग श्रुतस्कंध से हुई है ” इसके 6 खंड हैं (देखे- षट्खंड टीका) ” पहले खण्ड के सूत्र पुष्पदंत आचार्य (ई. 106-136) के बनाये हुए हैं, उनका शरीरान्तहो जाने के कारण शेष 4 खण्डों…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोम समानता – अर्हत भगवान का एक अतिषय – सजीव होते हुए भी नख रोम और केषो का समान रहना अर्थात न बढना। Roma samanata- A transcendental excellence of lord Arihant, not increasing of nails & hair