प्रकाश्य – प्रकाशक भाव!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाश्य – प्रकाशक भाव – Prakasya- Prakashka Bhava. Relation of illuminating objects & means of illu-mination. कार्य – कारण संबंध; प्रकाश्य पदार्थ है और, प्रदीप, सूर्य, चन्द्र आदि प्रकाशक हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाश्य – प्रकाशक भाव – Prakasya- Prakashka Bhava. Relation of illuminating objects & means of illu-mination. कार्य – कारण संबंध; प्रकाश्य पदार्थ है और, प्रदीप, सूर्य, चन्द्र आदि प्रकाशक हैं “
आरातीय Acharyas (Jaina – saints) of present tradition. वर्तमान परम्परा के आचार्य।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भामंडल – Bhamamdala. Name of Seeta’s brother, An auspicious em-blem of Lord Arihant. सीता का भाई, अष्ट प्रातिहायों में एक प्रातिहार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वज्ञशांवला – Nirvagyanshaamvalaa. A spiritual knowledge or study regarding Vidyadhars. एक विद्याधर विद्या “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेय–Meya. Measurable substances. मेय, देश, तुला, कालचतुर्विधमानो में एक भेद; प्रस्थ आदि के द्वारा मापने योग्य वस्तु मेय कहलाती है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय विनय – Bhaya Vinaya. Reverence due to fear. भय के कारण विनय करना “
आश्चर्य पंचक Five auspicious omen (good occurrences). पंचाश्चर्य-रत्नवृष्टि, देव दुंदुभि मंद सुगंधित वायु प्रवाह, जय जयकार की ध्वनि यह तीर्थंकर एंव अन्य विशिष्ट महामुनियों के आहार के समय देवों द्वारा की जाती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्मूढ़ – Nirmoorha. One rational, who is capable of knowing the super soul of Self. मूढ़ता रहित; निजपरमतत्त्व को जानने में समर्थ होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्युद्दंष्ट्र – Vidyuddanstra. Name of a vidyadhar king. एक विद्याधर, ध्यानस्थ मुनि संजयन्त पर घोर उपसर्ग किया ” धरणेन्द्र ने कुध्द होकर समस्त विद्याएं हर ली मारने को तैयार हुआ पर आदित्यप्रभ देव ने उसे आकर बचा लिया ” अपरनाम – विद्युददृ्ढ “