प्रत्येक शरीर वर्गणा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक शरीर वर्गणा- 23 वर्गणाओं में एक वर्गणा; एक-एक जीव के एक-एक शरीर में उपचित (संचित) हुए कर्म-नोकर्मस्कंण्रुप वर्गणा। pratyeka sarira vargana – a type of aggregates of karmic molecules
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक शरीर वर्गणा- 23 वर्गणाओं में एक वर्गणा; एक-एक जीव के एक-एक शरीर में उपचित (संचित) हुए कर्म-नोकर्मस्कंण्रुप वर्गणा। pratyeka sarira vargana – a type of aggregates of karmic molecules
तोरणाचार्य A spiritual teacher of Acharya Pushpanandi. आचार्य पुष्पनन्दि जी के गुरु, समय ई.678 के लगभग । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण सप्तभड्गी- प्रमाण में प्रत्येक धर्म की अपेक्षा सप्तमभंगी होती है; स्यात् अस्ति, स्यात् नास्ति, स्यात् अस्ति नास्ति स्यात् अवक्तव्य, स्यात् अस्ति अवक्तच्य, स्यात् नास्ति अवक्तव्य, स्यात् अस्ति नास्ति अवक्तव्य ये सप्तभंगी कहलाते है। PramanaSaptabhangi- Measure pertaining to seven combinations (Saptbhangi)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण गणना (लौकिक, लोकोत्तर)- लौकिक और अलौकिक मान; अलौकिक गणित के मुख्य दो भेद है-संख्यामान और उपमामान। PramanaGanana (Laukika, Lokottara)- Mathematical measure (universal, post universal)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमत्तयोग- कशाय सहित मन वचन काय की प्रवित्ति। Pramattayoga- Vibration due to passions, which agitate mind, body or speech
त्रयात्मक द्रव्य Substances having three properties (origination, destruction and continuity). द्रव्य में उत्पाद , व्यय और ध्रौव्य ये तीन आत्मारूप लक्षण होते हैं इसलिए उन्हें त्रयात्मक द्रव्य कहा जाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभाकर भट्ट- आचार्य योगेन्दुदेव के षिश्य एक दिगम्बर साधु, जिनको सम्बोधित करते हुए इन्होने “परमात्मा प्रकाष” ग्रंथ की रचना की है। Prabhakarabhatta- A Digambar Jain saint, disciple of Yogendudeva Acharya
तेजोलेश्या Yellow aura, virtuous condition of soul. पीत लेश्या, कत्र्तव्य को जानना, सबमें समभाव रखना, दया और दान में तत्पर दान में तत्पर रहना, मृदुभाषी और ज्ञानी होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]