जगत्सुन्दरी प्रयोगमाला!
जगत्सुन्दरी प्रयोगमाला A book written by Acharya Yashahkirti. आचार्य यशःकीर्ति (ई.श.१३) की एक रचना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जगत्सुन्दरी प्रयोगमाला A book written by Acharya Yashahkirti. आचार्य यशःकीर्ति (ई.श.१३) की एक रचना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तदाकार स्थापना Similar representation. निक्षेप पाषाण आदि में जिसकी स्थापना करनी हो उसकी वैसी ही मूर्ति बना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकर्षिणी – Prakarsini. A type of super knowledge. विधाधरों की एक विधा “
णिक्खोदिम A process of digging downward for obtaining some matters or water etc. क्रियाः पुष्करिणी, वापी, कूप, तड़ाग, लयन और सुरंग आदि निष्खनन क्रिया से सिद्ध हुए द्रव्य। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
आतपन योग An austerity; to stand opposite to sun in summer season. एक तप ग्रीष्म ऋतु में पर्वत के शिखर पर सूर्य के सम्मुख खडे़ होकर योग धारण करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
छाग A billy-goat, significant symbol of Lord Kunthunath. बकरा; कुंथुनाथ भगवान का चिन्ह ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सवितर्क – Savitarka. Unconscious thought activities in absolute meditation. पृथक्त्वविर्तक एवं एकत्व वितर्क दोनों शुक्लध्यान वितर्क सहित है। विचार करने को वितर्क कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंगसावरण – स्त्रीयो का लिग सावरण कहा गया है। Limgasavarana-The female ascetics
जंगम-प्रतिमा Body of Digambar Jain saint which is symbolic form of Lord-Arihant. दर्शन ज्ञान करके शुद्ध है आचरण जिन्का ऐसे वीतराग निर्ग्रन्थ साधु की देह उसकी आत्मा से पर होने के कारण जिनमार्ग में जंगम प्रतिमा कही जाती है अथवा ऐसे साधुओं के लिए अपनी और अन्य जीवों की देह जंगम पेरातिमा है , समवशरण…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वासंख्यात – Sarvaasankhyaata. Innumerable (uncountable). घनलोक सर्वासंख्यात है क्योंकि घनरूप से लोक के देखने पर प्रदेषों की गणना की अपेक्षा वे संख्यातीत है।