वस्तुग्राही नय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वस्तुग्राही नय – Vastugraahii Naya. A standpoint-accepting of partial knowledge of something. नय ;अनेकांतात्मक वस्तु के अंश को ग्रहण करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वस्तुग्राही नय – Vastugraahii Naya. A standpoint-accepting of partial knowledge of something. नय ;अनेकांतात्मक वस्तु के अंश को ग्रहण करना “
उरग A type of five sensed animal, Snake. पंचेन्द्रिय तिर्यंच का एक प्रकार सर्प।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मनाभ: Past-birth name of Lord Chandraprabhu, Father’s name of Chakravarti, Harishen, Another name of Ramchandraji. पूर्व धातकीखं डमें मंगलावती देश के रत्नसंचय नामक नगर कमे राजा कनकप्रभ का पुत्र, जो कि समाधिपूर्वक वैजयन्त विमान में अहमिन्द्र हुआ यह चन्द्रप्रभु भगवान के पूर्व का दूसरा भव है जिसमें उन्होंने तीर्थकर प्रकृति का बंध किया था…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति परोदय – Prakrti Parodaya. Karmic nature which binds in the fruition of other Karmic nature. ऐसी कर्म प्रक्रतियां (११) जिनका पर के उदय में बंध होता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसतिका – Vasatika.: Hermitage, staying place of saints. साधुओं के ठहरने का स्थान ” ध्यान – अध्ययन के योग्य निर्दोष शून्य स्थान ही उसके लिये उपयुक्त है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यशस्कांत– Yashsankat. Name of a deity of a summit of Manushattar mountain. मनुषोत्तर पर्वत के एक कूट का देव”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्षायोग – Varshaayoga.: Four months rainy seasonal staying of Jain saints at some particular place with particular restrictions. चातुर्मास; जैन साधु – साध्वियों का वर्षाकाल (आषाढ़ शुक्ला चतुर्दशी से कार्तिक कृष्णा अमावस तक ) में मुख्यतः जीव विराधना से बचने हेतु एक स्थान पर रहना ” वर्षायोग सम्बन्धी प्रतिष्ठापना व निष्ठापना की विशेष विधि…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदसमास: A part of scriptural knowledge (Shrutgyan). श्रुतज्ञान के 20 भेदो मे छठा भेद, इससे पूर्व समास पर्वत समस्त द्वादषांग श्रुत स्थित है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषय विराग – Vishaya Viraga. Renunciation of sensual enjoyments. पाँचों इन्द्रियों के सब शुख की अभिलाषा का त्याग विषय विराग है “